गोरखपुर।
मेडिकल कॉलेज में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) की शाखा में विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों को प्रशिक्षण दिया गया। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इपिडिमोलॉजी के चेन्नई के डायरेक्टर डॉ. मनोज मोरेकर ने विशेषज्ञों को सर्वे का तरीका बताया। इस सर्वे में विशेषज्ञ इंसेफेलाइटिस मरीजों में सामने आए स्क्रब टायफस बैक्टीरिया के जानलेवा होने के कारण तलाशेंगे।
पिछले दिनों एनआईवी और इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के वैज्ञानिकों ने स्क्रब टायफस को एईएस (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) का संभावित कारण माना था। एनआईवी के इंचार्ज डॉ. वीपी डोंड्रे ने बताया कि गोरखपुर और देवरिया के इंसेफेलाइटिस प्रभावित गांवों में 40 सदस्यीय विशेषज्ञों का दल स्क्रब टायफस की जांच के लिए सर्वे करेगा। इसमें मरीज और उसके परिवार के साथ ही पास-पड़ोस के लोगों से भी बातचीत की जाएगी। विशेषज्ञों को सर्वे से जुड़े सभी बिंदुओं को लेकर प्रशिक्षित किया गया है। प्रशिक्षण में एनआईवी, एनआईई, सीडीसी (कम्युनिकेबल डिजीज कंट्रोल), डब्ल्यूएचओ, मेडिकल कॉलेज आदि संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए।
ये है स्क्रब टायफस
करीब ढाई साल पहले एईएस मरीजों में स्क्रब टायफस की पहचान शोधकर्ताओं ने की थी। यह एक तरह का बैक्टीरिया है, जो एक खास प्रकार के कीड़े की लार में पाया जाता है। यह कीड़ा बड़े घास के मैदान, चूहों या गिलहरियों के शरीर में रहता है। जूं की तरह का यह कीड़ा जब बच्चों को काटता है तो यह बैक्टीरिया लार के साथ बच्चों के खून में मिल जाता है।