मेंहदावल(संतकबीरनगर)। चिकित्सकों की लापरवाही व समय से इलाज न मिलने के कारण सीएचसी परिसर में 16 अगस्त को डेढ़ माह की मासूम बच्ची की मौत हो गई थी। इस संबंध में पीड़ित परिजनों ने प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य व परिवार कल्याण सचिव से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की थी। उनके आदेश पर अपर सीएमओ ने जांच की थी। जांच में अधीक्षक, इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक समेत चार लोग दोषी पाए गए। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद भी अब तक कार्रवाई न होने से पीड़ित परिवार में गुस्सा है।
16 अगस्त को नायकटोला निवासी संतराम अग्रहरी की डेढ़ माह की मासूम बच्ची की उस समय मौत हो गई जब तबियत खराब होने पर वह सीएचसी लेकर पहुंचा तो इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर आवास पर चले गए थे। कैंपस में रहने वाले अन्य दो चिकित्सक यह कहते हुए इलाज से मना कर दिया कि इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक से इलाज कराएं। शिकायत करने अधीक्षक आवास पर पीड़ित पहुंचे तो यहां ताला लटक रहा था और लोगों ने बताया कि वह रात्रि विश्राम सीएचसी की जगह गोरखपुर करते हैं। ऐसे मे इलाज के अभाव मे बच्ची की मौत हो गई। मामला तहसील दिवस पर आया तो सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने जांच कर कार्रवाई का आदेश दिया। अपर सीएमओ ने अपने जांच में अधीक्षक वी पी पांडेय, चिकित्सक डॉक्टर लोकेश त्रिपाठी, डॉक्टर रंजीत अग्रहरी व इमरजेंसी ड्यूटी करने वाले डॉक्टर मोहन झा को दायित्वों के प्रति लापरवाह मानते हुए दोषी पाया और कार्रवाई की संस्तुति 23 अगस्त को सीएमओ दे दी। इसके बाद भी दोषी चिकित्सकों को बचाने में प्रशासन जुटा है। मृत बच्ची के पिता संतराम अग्रहरी ने कहा कि जांच अधिकारी अपनी जांच में चिकित्सकों को दोषी पाए जरुर पर विभागीय उच्च अधिकारी दोषी चिकित्सकों को बचाने की कवायद करते हुए जांच रिपोर्ट का अल्पीकरण कर रहे हैं। जिसका नतीजा हैं कि लापरवाह चिकित्सकों के कारण मासूम बच्चों की मौत नही रुक रही।