बाढ़ में फंसने से इलाज में हुई देरी की वजह से दम तोड़ने वाली बुजुर्ग महिला प्रभावती का शव रखकर घर वालों ने मंगलवार को मेडिकल कॉलेज रोड पर जाम लगा दिया। उनका आरोप था कि प्रधान ने समय से नाव नहीं दी। यदि नाव मिली होती तो प्रभावती की जान बचाई जा सकती थी। जाम की सूचना पाते ही एसपी सिटी विपिन सिंह फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने समझा-बुझाकर रास्ता खाली कराया। इस दौरान करीब एक घंटे तक आवागमन बाधित रहा।
मंझरिया गांव में जलप्रलय देख 80 वर्षीय प्रभावती देवी बेहोश हो गई थीं। चार घंटे की कोशिश के बाद घर वाले किसी तरह उन्हें होश में ले आए। इस दौरान वे एनडीआरएफ हेडक्वार्टर से लेकर बाढ़ नियंत्रण केंद्र को जल्द मदद पहुंचाने के लिए फोन करते रहे। उन्होंने गांव के प्रधान से भी नाव उपलब्ध कराने की मांग की, मगर सुनवाई नहीं हुई। प्रभावती के पुत्र महेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि नाव होने के बावजूद प्रधान ने उपलब्ध नहीं कराई। इस वजह से अगले दिन दोपहर में जब सेना पहुंची तो उन्हें मदद मिल सकी।
सेना की बोट से प्रभावती देवी को बाढ़ से निकालकर गोरखपुर लाया गया। डोमिनगढ़ बंधे के पास सेना के कैंप में प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर उपचार के लिए शाहपुर के एक हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन वहां देर रात उनकी मौत हो गई। महेंद्र ने आरोप लगाया कि देर से इलाज मिलने से उनकी मां की मौत हुई है। इसके लिए पूरी तरह से प्रधान जिम्मेदार हैं। उन्होंने प्रधान के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर भी दी, हालांकि पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया।
इलाज के अभाव में कृपाशंकर की मौत
बाढ़ में फंसे चौरीचौरा के डुमरी गांव के कृपाशंकर (48 साल) की मंगलवार को मौत हो गई। उनकी तबीयत अचानक खराब हुई थी। इसकी सूचना आला अफसरों को दी गई, फिर भी समय से सहायता नहीं मिल सकी। सूचना के कई घंटे बाद नाव पहुंच पाई। एसडीएम ज्योत्सना का कहना है कि बीमारी की सूचना मिलते ही नाव रवाना की गई थी लेकिन इससे पहले ही कृपाशंकर की मौत हो गई।