गोरखपुर। युवाआें के कौशल और योग्यता की नींव पर ही वर्तमान राष्ट्र की प्रगति आधारित है। युवा का अर्थ उम्र से नहीं बल्कि प्रवृत्ति से है। समर्पित और कर्तव्य निष्ठ युवा कठिन से कठिन चुनौती और लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। समाज के मूल और आदर्श इन्हें दिशा प्रदान करते हैं।
ये बातें महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज में आयोजित सात दिवसीय व्याख्यान माला के दूसरे दिन आई केयर इंडिया लखनऊ के यूपी त्रिपाठी ने कहीं। उन्होंने कहा कि व्यक्तित्व निर्माण एवं विकास में विचार की भी विशेष भूमिका मानी जाती है। विचार के मूल में ज्ञान और अनुभव का विशेष महत्व है। इसके लिए समाज के श्रेष्ठ जनों की संगति अत्यंत आवश्यक है।
कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. आरती सिंह ने ’मैथिलीशरण गुप्त के काव्य में राष्ट्रीय चेतना’ विषय पर कहा कि भारतीय नैतिक मूल्यों को प्रतिष्ठित करने वाले महापुरुषों में उनका नाम अनुकरणीय है। उन्होंने अपनी रचनाओं से युवाओं में राष्ट्रीय चेतना का मंत्र फूंका। कार्यक्रम में डॉ. यशवंत, प्रियंवदा सिंह, आकांक्षा सिंह, शांभवी त्रिपाठी, ज्योति सिंह आदि मौजूद थे।