गोरखपुर।
मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार को 100 बेड वाले वार्ड का निरीक्षण किया। उन्होंने बेड-टू-बेड मरीजों का हाल जाना और तीमारदारों को ढांढस भी बंधाया। सीएम डेढ़ घंटे तक वार्ड में रहे। इस दौरान उन्होंने मरीजों और तीमारदारों से खुद बात की। कोई डॉक्टर अगर बीच में बोलता तो वह उसे दूर कर देते थे। उधर, वार्ड की गैलरी में तीमारदारों ने योगी को घेर लिया। उनकी समस्या सुनने के बाद सीएम बोले, धैर्य रखिए, गंभीर बीमारी है। ठीक हो जाएगा आपका बच्चा। थोड़ा समय लगेगा, हरसंभव मदद होगी। इस दौरान सीएम ने कई दिनों से भर्ती मरीजों के तीमारदारों से ऑक्सीजन की कमी के बारे में भी जानकारी ली।
शुक्रवार को 12.25 बजे सीएम योगी आदित्यनाथ इंसेफेलाइटिस वार्ड में पहुंचे। अंदर दाखिल होते ही उन्होंने एक-एक तीमारदार से नाम और जिला पूछा। दवा, डॉक्टर की उपलब्धता और जांच की जानकारी ली। सीएम तीमारदारों से कोई परेशानी तो नहीं, आप का बच्चा कैसा है जैसे सवाल भी पूछते रहे। एक तीमारदार ममता आंखों में आंसू लिए सीएम के हर सवाल का जबाब देती रहीं। उन्होंने बताया कि तीन वर्षीय बेटी अदिति शुक्रवार सेे भर्ती है। ममता ने सीएम को बताया कि मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर की देखभाल से वह संतुष्ट है।
सीएम फैजाबाद के गंगाराम से भी मिले, जिनका डेढ़ वर्षीय बच्चा अंकेश भर्ती है। उन्होंने बताया कि सीएम ने बच्चे का हाल जाना और परिवार के बारे में पूछताछ की। फिर उन्होंने पर्चा देखा और डॉक्टरों से पूछा, दवा क्या चल रही है। बच्चा कम तक ठीक हो जाएगा। जरूरी जांच हुई कि नहीं। बच्चे को रुमाल से पोंछ रहे गंगाराम की आंखें सीएम को देखकर भर गई। सीएम ने उनके कंधे पर हाथ रखकर दिलासा दिया, घबराइए मत, सब ठीक हो जाएगा। गंगाराम ने बताया कि पहले बेड पर दो से तीन लोग भर्ती थे, लेकिन सीएम के आने से पहले सब ठीक हो गया।
बलिया के गोला निवासी अंजना नौ माह की बेटी आराध्या के साथ एक सप्ताह पहले 100 वार्ड में भर्ती हुईं। सीएम ने उसने भी मुलाकात की। सवाल जवाब के बाद उन्होंने सीएम को बताया कि समय से दवा मिल रही है। सही ढंग से उपचार हो रहा है। बिहार के बेतिया इलाके के जोगीपट्टी के रहने वाले जंगबहादुर निषाद सात वर्षीय बेटे बूलट को लेकर भर्ती हैं। मुख्यमंत्री से जंग बहादुर से भी बच्चे का हाल पूछा। उन्होंने योगी को बताया कि ऑक्सीजन खत्म होने के बाद डेढ़ घंटे तक मेडिकल कॉलेज के हाथ-पांच फूल गए थे। तीमारदारों को काम चलाने के लिए एंबुबैग थमाए गए थे।