17 हजार रेलकर्मियों का फंसा भत्ता
यात्रा, ओवरटाइम, नाइट ड्यूटी भत्ता व प्रतिपूर्ति शुल्क का भुगतान नहीं
समय से तैयार नहीं किया प्रस्तावित बजट, अब लटकाया
राजन राय
गोरखपुर। रेलवे में अफसरों की लापरवाही से लखनऊ मंडल और मुख्यालय में तैनात करीब पांच हजार रेलकर्मियों का भत्ता फंस गया है। इज्जतनगर और लखनऊ मंडल में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। इसमें रनिंग स्टॉफ ज्यादा हैं जिनका यात्रा भत्ता, नाइट ड्यूटी, ओवरटाइम का भुगतान करीब पांच से छह महीने से नहीं हुआ है। यह रकम 30 से 40 हजार रुपये तक है। जबकि वित्तीय वर्ष 2017-18 में लखनऊ मंडल के करीब 12 हजार रेलकर्मियों के शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान नहीं हुआ है। नाराज रेलकर्मियों ने अलग-अलग संगठनों के साथ आंदोलन भी शुरू कर दिया है।
गोरखपुर स्टेशन और मुख्यालय पर तैनात इंजीनियरिंग, सिग्नल, वाणिज्य, बिजली विभाग के ज्यादातर रेलकर्मी भत्ता नहीं पाए हैं। 60 फीसदी ट्रैक मैन और प्वाइंटमैन को 2017-18 का प्रतिपूर्ति शुल्क नहीं मिला है। इसी तरह 1000 से ज्यादा एसी मैकेनिक को नाइट ड्यूटी का भत्ते नहीं मिल पाया है। विभागीय जानकारों की माने अधिकारियों ने प्रस्तावित बजट तैयार करने में ही सुस्ती की। इसी से भुगतान की प्रक्रिया लटक गई।
पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ के प्रवक्ता एके सिंह ने कहा कि कार्मिक और पर्सनल विभाग की लापरवाही का खामियाजा रेलकर्मी भुगत रहे हैं। पहले भी इसी तरह किया गया था। दबाव बनाकर आठ महीने पहले सात करोड़ रुपये का भुगतान कराया गया था। रेलकर्मियों के बकाया भत्ता का मामला एनएफआईआर के महामंत्री डॉ राघवैया ने रेलवे बोर्ड के मेंबर स्टॉफ के सामने भी उठाया है।
15000 यात्रा भत्ता पाते हैं टीटीई
ट्रेनों और जांच टीम में तैनात टीटीई हर महीने करीब 15000 हजार रुपये भत्ता पाते हैं। लखनऊ मंडल में तैनात करीब 350 टीटीई को पिछले छह महीने से भत्ते का भुगतान नहीं हुआ है।
27000 एक बच्चे पर प्रतिपूर्ति शुल्क
प्रतिपूर्ति शुल्क का भुगतान रेलकर्मी की श्रेणी के हिसाब से होता है। टीटीई वर्ग में एक बच्चे पर 27000 रुपये सालाना भुगतान रेलवे करता है। अधिकतम दो बच्चों पर भुगतान का प्रावधान है।
कोट
बजट की कमी के चलते कुछ रेलकर्मियों के भत्ते का भुगतान नहीं हो सका था। अब पर्याप्त बजट आ गया है। जल्द ही भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सभी रेलकर्मियों के भत्ते का भुगतान हो जाएगा।
संजय यादव, सीपीआरओ, एनईआर