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विसंगतियों पर चोट कर गया ‘ठाकुर का कुआं’

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गोरखपुर।
गोरखपुर थियेटर के बैनर तले शनिवार को रैंपस स्कूल में मुंशी प्रेमचंद की कहानी ‘ठाकुर का कुआं’ का नाट्य मंचन हुआ। कलाकारों ने अपने अभिनय से कथानक में प्राण फूंक दिए। नाटक के जरिये कलाकारों ने सामाजिक जीवन की विसंगतियों पर करारी चोट की। निर्देशन मृत्युंजय शंकर सिन्हा ने किया।
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गंवई पृष्ठभूमि पर केंद्रित इस कथानक में ग्रामीण जनजीवन की विसंगतियों पर तीखा हमला किया गया। छुआछूत के खिलाफ अलख जगाते इस नाटक का किरदार छुआछूत के चलते बीमारी की हालत में बदबूदार पानी पीने को मजबूर होता है। पत्नी गंगी भय और आतंक के साए में जीते हुए पति के लिए चोरी करने को मजबूर होती है। मुख्य अतिथि गोरखपुर आकाशवाणी के सहायक निदेशक डॉ. तहसीन अब्बासी ने कलाकारों के प्रदर्शन को सराहा। गंगी की भूमिका में श्रेया राय, ठाकुर की भूमिका में सर्वेश, पटवारी की भूमिका में दिवस गुप्ता, कुंदन की भूमिका में मृत्युंजय, घीसू की भूमिका में आकाश, पंडित की भूमिका में कनिष्क आदि ने प्रभावशाली अभिनय किया। इस मौके पर गोरखपुर थियेटर एसोसिएशन की अध्यक्ष विनीता श्रीवास्तव, सचिव रवींद्र रंगधर, विवेक श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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