गोरखपुर। स्वच्छ सर्वेक्षण में इस बार बेहतर रैंकिंग हासिल करना नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती साबित होगी। बेहतर सफाई व्यवस्था, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, खुले में शौच से मुक्त शहर के मानकों को 31 दिसंबर तक की समय सीमा में पूरा कर पाना काफी मुश्किल है। विभिन्न मानकों संबंधी वास्तविक रिपोर्ट नगर निगम को स्वच्छ सर्वेक्षण की वेबसाइट पर अपलोड करनी है। फीडिंग किए गए दावों के उलट अगर किसी भी प्रकरण में स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम को धरातल पर कुछ और दिखता है तो अंकों में कटौती भी झेलनी होगी। चार जनवरी से स्वच्छ सर्वेक्षण के लिए सर्वे शुरू हो जाएगा।
सोमवार को शहर के एक होटल में आयोजित स्वच्छ सर्वेक्षण-2018 के लिए आयोजित कार्यशाला में भारत सरकार के आवास व शहरी मामलों के मंत्रालय के विशेषज्ञों ने स्वच्छ सर्वेक्षण के नए प्रारूप की जानकारी दी। मंडल स्तरीय कार्यशाला में गोरखपुर, बस्ती, आजमगढ़, देवीपाटन और फैजाबाद निकायों के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश सिंह ने दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। मंत्रालय के विशेषज्ञ सतीश कुमार ने बताया कि इस बार 4000 अंकों के आधार पर मार्किंग होगी। दो साल पहले हुए सर्वे में गोरखपुर को देश के विभिन्न नगर निकायों में 314वीं रैंक हासिल हुई थी। इसके बावजूद गोरखपुर नगर निगम ने सुधार के लिए कुछ खास नहीं किया। बेहतर रैंक के लिए बेहतर प्रदर्शन करना होगा। चार जनवरी से शुरू होने वाले सर्वे के दौरान मंत्रालय की टीम शहर के बड़े रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड के 500 वर्ग मीटर के क्षेत्र में सफाई व्यवस्था की जांच करेगी। कूड़े के बेहतर ढंग से निस्तारण के लिए सर्विस चार्ज भी लगाना जरूरी होगा। मार्किंग में इसके अंक भी जोड़े जाएंगे। उन्होंने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट संबंधी एप की भी जानकारी दी।
मुख्य अतिथि कमिश्नर अनिल कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छता अभियान के लिए आयोजित कार्यशाला में काफी संख्या में भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही आशा जताई कि इस बार गोरखपुर की रैंकिंग सुधरेगी। गौतम गुप्ता ने शहर को खुले में शौच से मुक्त करने की योजना संबंधी जानकारी दी। इस दौरान मुख्य कर निर्धारण अधिकारी रबीश चंद्र, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुकेश रस्तोगी समेत नगर निगम के तमाम अधिकारी मौजूद थे।
इन स्थानों का टीम करेगी निरीक्षण
सर्वेक्षण एजेंसी झुग्गी बस्तियां, नियोजित कॉलोनी, मुख्य सार्वजनिक स्थान, मुख्य बाजार क्षेत्र, धार्मिक स्थान, शहर का सबसे बड़ा बस स्टैंड, सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन, सॉलिड वेस्ट उत्पादन करने वाले होटल, शादी हॉल, साप्ताहिक सब्जी बाजार क्षेत्र, सामुदायिक शौचालयों का निरीक्षण कर नगर निकायों के दावों की जांच करेगी। इसके बाद मार्किंग होगी, जिसके आधार पर स्वच्छ सर्वेक्षण की ग्रेडिंग तैयार की जाएगी।
सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की सफलता के लिए यूजर चार्ज जरूरी
नगर निगम के चीफ इंजीनियर सुरेश चंद ने कार्यशाला में सूरत नगर पालिका के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की सफलता की कहानी बताई। कहा कि सुनियोजित कार्ययोजना से ही शहर को साफ रख सकते हैं। लोगों को कचरे को घर पर ही अलग-अलग रखने की आदत विकसित करनी होगी। ऐसा ही सफाई कर्मचारी एवं सुपरवाइजरों को करना होगा। कूड़ा फेंकने की समय सीमा निर्धारित होनी चाहिए। इसके बाद सड़क पर कूड़ा फेंकने वालों के खिलाफ जुर्माना वसूलना चाहिए। सूरत नगर पालिका ने पिछले वर्ष 1.4 लाख लोगों से जुर्माने के रूप में 2.01 करोड़ रुपये वसूले। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही शहर के सभी हाउस होल्डरों के बिल में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए यूजर चार्ज निर्धारित कर देनी चाहिए, ताकि एजेंसियों को शुल्क वसूलनेे के लिए अलग से मशक्कत नहीं करनी पड़े।
कुछ इस आधार पर भी होगी मार्किंग
- पार्कों में पिट बनाने के लिए- 18 अंक
- ठोस एवं गीले कचरे को ट्रेंचिंग ग्राउंड तक पहुंचाने के लिए- 40 अंक
- जैविक खाद बनाने के लिए- 20 अंक
- सार्वजनिक शौचालयों के लिए- 56 अंक
- पेट्रोल पंप के टॉयलेट का इस्तेमाल- 18 अंक