गोरखपुर।
पूर्वांचल में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) का कहर थमा है। कभी पूर्वांचल के नौनिहालों के लिए काल का पर्याय बनी इस बीमारी पर वृहद टीकाकरण के जरिये अंकुश लगाया जा सका है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आंकड़े इसकी तस्दीक करते हैं। इस साल 820 इंसेफेलाइटिस मरीजों की पैथालॉजी जांच में एक की भी जेई रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई है। इससे पहले 2016 में 175 जेई पीड़ित मरीज मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराए गए थे।
राज्य सरकार ने विशेष अभियान के तहत पूर्वांचल के 92 लाख बच्चों को जेई का टीका लगवाया है। इसकी कवायद पिछली सरकार के दौरान ही सदर सांसद योगी आदित्यनाथ के प्रयास से शुरू हो गई थी। योगी आदित्यनाथ जब सीएम बने तो उन्होंने छूटे हुए बच्चों का टीकाकरण कराया। दो बार विशेष अभियान भी चला। अब इसका असर सामने आने लगा है। मेडिकल कॉलेज के अब तक के आंकड़े बताते हैं कि यहां जापानी इंसेफेलाइटिस से पीड़ित एक भी मरीज भर्ती नहीं किया गया है। जिन बच्चों की मौत इंसेफेलाइटिस से हुई है, उनमें भी जेई के लक्षण नहीं पाए गए। एक सितंबर 2017 तक मेडिकल कॉलेज में 820 इंसेफेलाइटिस के मरीज भर्ती किए गए हैं। इन सबकी पैथालॉजी जांच भी कराई गई। सभी के जेई सैंपल निगेटिव मिले। कॉलेज प्रशासन के मुताबिक पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती 755 बच्चों और मेडिसिन वार्ड में भर्ती 65 इंसेफेलाइटिस मरीजों की जेई रिपोर्ट देखी गई थी। एक सितंबर तक इंसेफेलाइटिस से जो 185 मौतें हुई हैं, उनमें एक भी केस में मौत की वजह जेई को नहीं माना गया है। ये मौतें एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) से हुई हैं।
पूर्वांचल के इन जिलों में था असर
गोरखपुर, बस्ती, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, वाराणसी, चंदौली और जौनपुर सहित अन्य जिले।
पिछले सालों में जेई की स्थिति
मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों पर गौर करें तो 2008 में 176, 2009 में 375, 2010 में 417, 2011 में 210, 2012 में 133, 2013 में 154, 2014 में 101, 2015 में 129 और 2016 में 175 जेई मरीज आए थे। इस बार एक सितंबर तक यह आंकड़ा जीरो है।