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ग्राउंड रिपोर्ट ...अंकल मेरा स्कूल भी डूब गया

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राजीव रंजन
गोरखपुर। माता-पिता के साथ एनडीआरएफ की बोट पर बैठे चार साल के आदित्य ने जब अपने जेपी स्कूल को देखा तो अनायास ही उसके मुंह से निकल गया। ‘... अंकल, मेरा स्कूल भी डूब गया है।’ घर तक पानी पहुंचने के बाद मंझरिया के आदित्य रविवार को एनडीआरएफ की बोट से माता-पिता के साथ गांव से बाहर निकले।
रविवार तड़के घुनघुन कोठा में गाहासाड़-उत्तरी कोलिया बांध टूटने के बाद घुनघुन कोठा, मंझरिया, उतरासोत, टिकरिया, गोविंदपुर, मझिगावा, बेला, जमुआड़, मोहम्मदपुर, उत्तर कोलिया, डोमिनगढ़ आदि गांव के लोग राप्ती के पानी से पूरी तरह घिर गए। गांव में आठ से 10 फीट तक पानी भर गया है। पानी में डूबा मंझरिया गांव का प्राथमिक स्कूल हालात की संवेदनशीलता बयां कर रहा था। घुनघुन कोठा और मंझरिया में 250 लोगों के फंसे होने की सूचना के बाद एनडीआरएफ की टीम ने एक-एक कर लोगों को निकालना शुरू किया। इन लोगों के सामने अब काफी समस्याएं खड़ी हो गई हैं। कई लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा है।
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हैलो... पूरा गांव पानी में डूब गया है, मदद भेजिए
घुनघुन कोठा के जयकेश यादव ने गांव में पानी घुसने पर 100 नंबर पर फोन कर मांगी मदद। जयकेश ने कहा कि सुबह करीब चार बजे बांध कटने की सूचना मिली। आठ बजे तक आठ से 10 फीट तक पानी भर गया। घर-परिवार पानी में घिर गया। ऐसे में 100 नंबर पर मदद मांगी, लेकिन करीब छह घंटे बाद एनडीआरएफ की टीम घर पहुंची और फिर वे बाहर निकल सके। उन्होंने बताया कि पत्नी और बच्चों को भटहट ससुराल पहुंचाकर सोमवार को घर लौटेंगे। माता-पिता और बहन घर पर ही है। उन्हें अकेला नहीं छोड़ सकते। आगे जो होगा देखा जाएगा।

घर नहीं छोड़ना चाहते कई ग्रामीण
पूरा घर पानी में डूब गया है। खाने की बात कौन कहे, पीने का पानी तक मयस्सर नहीं है। छत एक मात्र ठिकाना है, लेकिन काफी संख्या में ऐसे भी लोग हैं जो अपना घर छोड़ना नहीं चाह रहे। एनडीआरएफ की टीम के साथ पहुंची पुलिस के कई बार एनाउंसमेंट के बाद भी लोग घर छोड़ने को तैयार नहीं हुए। अलबत्ता उन्होंने प्रशासन से नाव समेत अन्य जरूरी चीजों की मांग की।

बिजली कटी, फोन पर बात करना भी हो जाएगा मुश्किल
सुरक्षा के दृष्टिकोण से गांवों की बिजली भी काट दी गई है। ऐसे में रात के वक्त पूरा गांव अंधेरे में डूब गया। लोगों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल जहरीले कीड़ों के घरों में घुसने से है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से बाढ़ पीड़ितों को माचिस, मोमबत्ती आदि उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। आने वाले समय में लोगों को दूसरी बड़ी दिक्कत बाहर रिश्तेदारों से बात नहीं कर पाने की होगी। बिजली कटने से बाढ़ से घिरे लोगों के लिए मोबाइल फोन चार्ज कर पाना मुश्किल होगा।

दाह संस्कार के लिए नाव का इंतजार
मंझरिया गांव में दिलीप की नानी की शनिवार रात मौत हो गई थी। बाढ़ आ जाने से रविवार तक उनका शव घर में पड़ा था। फोन करने के बाद भी कोई मदद नहीं मिल पा रही थी। 36 घंटे बाद भी दाह संस्कार न होने से पूरा परिवार परेशान है। दिलीप ने बताया कि प्रधान को भी कई बार फोन कर जानकारी दी गई, लेकिन नाव उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। प्रधान वीरेंद्र यादव ने बताया कि नाव की व्यवस्था की जा रही है। पहले दाह संस्कार का इंतजाम करने के बाद शव वहां पहुंचाया जाएगा।

डोमिनगढ़-जगतबेला रेलवे ट्रैक बनी ‘सड़क’
बांध कटने के बाद सभी गांवों का संपर्क सड़क से कट गया है। सड़कों पर आठ से 10 फीट पानी भरा है। ऐसे में लोग किसी तरह डोमिनगढ़-जगतबेला रेलवे ट्रैक पहुंच रहे हैं। वहां से पैदल ही डोमिनगढ़ होते हुए शहर पहुंच रहे हैं। घुनघुन कोठा, मंझरिया, उत्तरी कोलिया, टिकरिया, मझिगावां के काफी लोग रविवार को नए ठिकाने की तलाश में ट्रैक के किनारे चलते हुए डोमिनगढ़ पहुंच रहे थे।
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ट्रैक पर पानी भरने की आशंका
राप्ती और रोहिन का जलस्तर बढ़ने के साथ ही डोमिनगढ़-जगतबेला रेलवे ट्रैक पर पानी भरने की आशंका है। रेलवे ट्रैक से पानी करीब आधा फीट ही नीचे रह गया है।

आंध्र प्रदेश से भी एनडीआरएफ की टीम पहुंची
घुनघुन कोठा में कटान के बाद आंध्रप्रदेश से विजयवाड़ा की एनडीआरएफ की 23 सदस्यीय टीम गोरखपुर पहुंची है। दोपहर बाद एनडीआरएफ ने चार इनफ्लैटेबल रबर बोट (आईआरबी) से बचाव कार्य शुरू किया। टीम लीडर इंस्पेक्टर सतीश कुमार ने बताया कि यह टीम गाजियाबाद से पहुंची है। एक बोट से 800 किलोग्राम वजन ढोया जा सकता है। ऐसे में 12 से 15 लोेगों को एक बार बाहर लाया जा सकता है।
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