गोरखपुर। दाउदपुर चौराहे पर स्थित क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी का दफ्तर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। बारिश से सड़क और नाली का गंदा पानी पूरे दफ्तर में घुस गया है। गंदगी के बीच कर्मचारी काम करने को मजबूर हैं। हर सीजन में इस हाल से कर्मचारियों को गुजरना पड़ता है, मगर हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। इससे दो मंडल और दो जिलों के कॉलेज, शिक्षकों से संबंधित दस्तावेजों के खराब होने का खतरा है।
प्रदेश के आठ क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में शुमार गोरखपुर का यह कार्यालय सबसे पुराना है। 1982 में दफ्तर की नींव पड़ी। तब से आज तक ये दफ्तर किराए के मकान में चल रहा है। गोरखपुर, बस्ती मंडल के साथ ही बलरामपुर, श्रावस्ती के कॉलेजों, शिक्षकों का काम यहीं से होता है। फिर भी दफ्तर की दशा बदलने की कोशिश नहीं हुई। यहां एक से डेढ़ फीट तक पानी भरा है। कर्मचारी कहते हैं कि बारिश में काम करना मुश्किल हो जाता है। ईंट लगाकर दफ्तर में घुसना पड़ता है। कई बार घुटनों तक पानी आ जाता है। दस्तावेज भी भीग जाते हैं। सीलन से फाइलें खराब हो जाती हैं। रोजाना आधे से एक घंटा दफ्तर से पानी निकालने में बर्बाद होता है। इसके बगैर काम नहीं किया जा सकता है।
वर्जन
दफ्तर की जमीन के लिए गोरखपुर यूनिवर्सिटी और डीएम को पत्र लिखा गया है, मगर अब तक जमीन नहीं मिली है। जमीन मिलते ही दफ्तर का निर्माण शुरू कराया जाएगा।
- डॉ. राजीव पांडेय, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी