गोरखपुर।
गुजरात के सूरत शहर में कपड़ा व्यापारियों पर लाठीचार्ज के विरोध में शुक्रवार को गोरखपुर कपड़ा व्यापार बंद रहा। वहीं व्यापारियों ने कपड़ा को जीएसटी के दायरे में लाने का विरोध किया और सरकार से मांग पर विचार करने की मांग की।
शुक्रवार को गीता प्रेस रोड स्थित कपड़ों की दुकानों में सन्नाटा छाया रहा। माहौल मंगलवार को होने वाली साप्ताहिक बंदी की तरह था। सभी दुकानों में ताले लटके हुए थे। थोक वस्त्र व्यापारी वेलफेयर एसोसिएशन के आह्वान पर शहर के कपड़ा व्यापारियों ने अपनी-अपनी दुकानें बंद रखी। उधर, कालीबाड़ी मंदिर में इकट्ठा होेकर व्यापारियों ने सूरत में मांगाें को लेकर प्रदर्शन कर रहे कपड़ा व्यापारियों पर लाठीचार्ज की निंदा की। कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों पर लाठीचार्ज करना तानाशाही का प्रतीक है। अगर शांतिपूर्ण ढंग से कोई प्रदर्शन कर रहा है तो उसकी बात सुननी चाहिए, लेकिन सूरत में पुलिसकर्मियों ने लाठी से पिटाई कर दी। इसमें काफी संख्या में व्यापारी घायल हुए। यह बहुत ही निंदनीय है। सरकार को व्यापारियों की मांग पर फिर से विचार करना चाहिए और उनकी समस्याओं और संदेहों को दूर करना चाहिए।
इस मौके पर अध्यक्ष राजेश नेभानी, बलराम अग्रवाल, पवन अग्रवाल, मनीष सर्राफ, शिव कुमार अग्रवाल, संजय अग्रवाल, आशीष अग्रवाल, रवि अग्रवाल, बांके बिहारी रुंगटा आदि मौजूद थे।