गोरखपुर।
मेडिकल कॉलेज के नियोनेटल यूनिट (एनएनयू) में इस साल 785 नवजातों की मौत के बाद जिम्मेदार जागे हैं और इन मौतों के पीछे संक्रमण को वजह मानते हुए अब इसका विसंक्रमण कराना शुरू कर दिया है। इसके लिए दो दिनों तक एनएनयू को पूरी तरह से खाली कराकर यहां भर्ती मरीजों को बगल के कमरे में शिफ्ट कर दिया गया है। इसमें वार्मर भी रखा गया है।
22 जून को अपर मुख्य सचिव अनीता भटनागर जैन के सामने नवजातों की मौतों का मामला आया था। उनके दौरे के बाद नवजातों की मौतों की संख्या में और इजाफा हुआ। जुलाई में मौतों के आंकड़े तेजी से बढ़े। महज तीन दिन में ही 33 नवजात भर्ती हुए। इनमें से 18 की मौत हो गई। इस साल एनएनयू में 1948 नवजात भर्ती हुए और कुल 785 मौतें हुईं। इसे लेकर डॉक्टरों ने एनएनयू में संक्रमण फैलने की आशंका जताई। डॉक्टरों का मानना है कि एक-एक वार्मर पर तीन से चार मासूमों के भर्ती होने के कारण संक्रमण फैल सकता है। इसके बाद वार्ड को खाली कराने का फैसला किया गया। बीते पांच दिनों से डॉक्टर व कर्मचारी भर्ती बच्चों के लिए अस्थाई वार्ड तैयार करने में जुटे रहे। मंगलवार को वार्ड खाली कराया गया। विसंक्रमण के लिए छिड़काव कराया गया। इसके बाद एनएनयू को दो दिन के लिए सील कर दिया गया है।
गंभीर हालत वाले नवजात का होता है उपचार
एनएनयू में गंभीर नवजात बच्चे भर्ती होते हैं। प्रीमेच्योर डिलीवरी, कम वजन, पीलिया, निमोनिया और संक्रामक बीमारी से पीड़ित नवजात बच्चों को इसमें भर्ती किया जाता है। सबसे ज्यादा उन बच्चों की संख्या होती है जो कि जन्म के बाद बाहरी वातावरण में सही से सांस नहीं ले पाते।
संक्रमण नहीं फैला है सिर्फ उसकी आशंका है। इसलिए विसंक्रमण कराया जा रहा है। प्रक्रिया शुरू हो गई है। दो दिन तक एनएनयू को सील रखा जाएगा। इसके बाद ही नवजातों को भर्ती किया जाएगा।
- डॉ. कफील अहमद, प्रभारी, इंसेफेलाइटिस वार्ड