हैंसर(संतकबीरनगर)। शनिवार को मानसून ने जिले मेेें दस्तक दे दी है। इसके साथ ही रुक-रुक कर बारिश भी होने लगी है। इससे घाघरा का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। बाढ़ से बचाव के लिए घाघर के किनारे बनाया गया करीब 32 किलोमीटर लंबा रामपुर-मकदूमपुर व बहराडाडी महाबांध की मरम्मत इस वर्ष हुई ही नहीं। जबकि, दोनों बांधों में जगह-जगह रेनकट और रैट होल की भरमार है। बांध की दशा देखकर स्थानीय लोग सहमे हुए हैं। उन्हें डर सता रहा है कि नदी ने विकराल रूप धारण किया तो हैंसर और पौली ब्लॉक में तबाही तय है।
दरअसल, बहराडाडी महाबांध के कारण ही क्षेत्र में घाघरा अधिक तबाही नहीं मचा पाती है। इस साल बांध का मरम्मत कार्य नहीं हुआ जिससे बांध पर जगह- जगह बने होल और हुए रेन कट के कारण बांध कमजोर हो गया है। ग्रामीण रामदयाल, उदयभान, कमरेआलम, देवेंद्र यादव, जयराम आदि का कहना है कि बांध का मरम्मत न होने से पानी का वेग रोकना बांध के लिए संभव नहीं होगा। इतना ही नहीं छपरामगर्बी गांव के दक्षिण नदी के किनारे हुए बालू खनन से नदी की धारा बांध की तरफ तेजी के साथ बढ़ सकती है। जिससे पानी का दबाव बांध पर पडे़गा। ड्रेनेज खंड विभाग ने अभी तक कोई भी मरम्मत कार्य नहीं किया है। ग्रामीणों ने बताया कि अगर बाढ़ आई तो बांध के किनारे बसे गांव नेतवापुर, छपरामगर्वी, बगही, मदरा, सिसवा, बिजलहिया, कटहा उर्फ भिटहा, चपरा पूर्वी, तुर्कवलिया नायक, अशरफपुर, ढेबरी, नर्चहा, बकईनिया, जगदीशपुर, भिखारीपुर, रमवापुर, शनिचरा, डिहवा, दीपपुर, पिपरही समेत करीब तीन सौ गांव प्रभावित होंगे। वहीं ड्रेेनेज खंड के एक्सईएन राजनाथ सिंह यादव ने बताया किया धन की कमी की वजह से बांध का मरम्मत नहीं हो पाई। धन की डिमांड की गई है। धन आते ही जहां मरम्मत की आवश्यकता होगी मरम्मत करा दी जाएगी।