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नहीं दे रहे निवाला, गोशालों में अव्यवस्था का बोलबाला

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इटवा के पेड़ाड़ी स्थित गोशाला में 20 जनवरी को करीब 400 से अधिक पशु रखे गए थे। अब यहां 20-25 पशु ही रह गए हैं। - फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। छुट्टा पशुओं से निजात दिलाने के लिए बनी पांच अस्थाई गोशालाओं से स्थानीय लोगों ने पशुओं को छोड़ दिया। पूछे जाने पर लोगों ने बताया कि चारे-पानी की समुचित व्यवस्था नहीं थी, ऐसा न करते तो पशुओं की जान चली जाती। वहीं नाम न छापने की शर्त पर कई प्रधानों ने वह गोशाला की व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे हैं। वहीं शासन के निर्देश के चलते प्रशासन हर हाल में गोशालाओं का संचालन सुचारु रूप से कराना चाह रहा है।
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दरअसल शासन के निर्देश पर जिले की 152 न्याय पंचायतों में अस्थाई गोशाला निर्माण होना है। तमाम प्रयासों के बाद भी अब तक 34 अस्थाई गोशालाओं का संचालन शुरू हो सका है। यहां भी स्थिति बेहतर नहीं है। शोहरतगढ़ के मुड़िला किसी तरह गोशाला तो बना दी गई, लेकिन श्मशान के पास भूमि होने के कारण यहां कोई जाना नहीं चाह रहा था। प्रधान प्रतिनिधि बृजमोहन ने बताया कि संचालन सुचारु न होने पाने के कारण उन्होंने मजबूरन एक फरवरी को गायों को गोशाला से छोड़ दिया। इसे लेकर उन्होंने एसडीएम को बकायदा पत्र भी सौंपा है। इसमें उन्होंने बताया है कि चारा और पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। ऐसे में गोशाला बंद कर दी जाए। वहीं एसडीएम अनिल कुमार के अनुसार, उन्होंने पशुओं को पकड़वाकर पास की गोशाला में पशुओं को शिफ्ट करा दिया।

वहीं इटवा ब्लॉक के चेचराफ बुजुर्ग और इनरी ग्रांट में भी कुछ ऐसा ही हाल है। यहां भी अव्यवस्था के चलते पशुओं को छोड़ दिया गया। चेचराफ में छह फरवरी से शुरू हुई गोशाला महज पांच दिन चली। यहां के दुधई और सुखराम ने बताया कि अगर एक भी गाय मर गई तो कौन पाप का भगीदार बनेगा। इसकी वजह से क्षेत्र के लोगों ने गायों को छोड़ दिया। इनरी ग्रांट का 19 जनवरी को गोशाला बनी। यहां छह दिन ही गाय रह सकीं। ग्रामीण रामसुभग और संतराज यादव ने बताया कि गायों को खाने के तक के लिए चारा नहीं थे। ऐसे में गायों को मारने के लिए छोड़ा जाना ठीक नहीं था। मौसम भी खराब था। अगर नहीं छोड़ा गया होता तो कई गायों की जान चली जाती।
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इटवा के पेड़ाड़ी स्थित गोशाला में 20 जनवरी के आसपास 400 से अधिक पशु रखे गए थे। लेकिन जब चारे का इंतजाम नहीं हो सका, तो आसपास के लोगों ने गायों को छोड़ दिया। इसे लेकर एक पखवारे पूर्व क्षेत्र के लोगों ने बिस्कोहर मार्ग को जाम भी कर दिया था। अब स्थिति ऐसी हो गई है कि नाम के पशु गोशाला में रह गए हैं। लोटन में बनी गोशाला में भी चारे का इंतजाम न होने के कारण वहां के प्रधान ने एक सप्ताह पहले ही गोशाला से गायों को छोड़ दिया था। डीएम कुणाल सिल्कू ने बताया कि हर ग्राम पंचायतों के खाते में गोशाला के संचालन के लिए लिए दो-दो महीने की राशि भेज दी गई है। रुपये के अभाव में गोशाला किसी भी कीमत पर बंद नहीं होने दी जाएगी। अगर कोई भी प्रधान रुपये के अभाव में गोशाला बंद करने की बात करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। रही बात ग्रामीणों के खोलने की तो उसे भी पता कराया जाएगा, जो भी ऐसा करेगा। उसके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

छह से अधिक गायों की हो चुकी है मौत
जिले में बने गोशाला में अब तक छह से अधिक गायों की मौत हो चुकी है। इनमें लोटन, नौगढ़, शोहरतगढ़ के गोशाला शामिल हैं। इतना ही नहीं मौसम खराब होने के कारण कई गायें बीमार भी हो चुकीं हैं। इन सबके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है।
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