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अमित शाह

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मन के भाव से उभरकर चुनावी मंच तक पहुंचे राम
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जय श्रीराम, जय-जय श्रीराम बोलकर सीएम एक साथ कर गए कई काम
आशुतोष मिश्र
महराजगंज। भारत माता की जय के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जय श्रीराम, जय-जय श्रीराम बोलकर एक साथ कई काम कर दिए। जिला जेल ग्राउंड में गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल के कार्यकर्ताओं से खचाखच भरे पंडाल में इस जयकारे ने लोगों में जोश भर दिया। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के सामने सीएम बिना कुछ कहे गोरक्षपीठ के अपने गुरुओं के संघर्ष को एक बार फिर से आवाज भी दे गए। मन में दबे राम भाव बनकर चेहरे पर आए और फिर चुनावी मंच पर उभर गए।
राम नाम की गूंज में अमित शाह भी शामिल हो गए। माहौल भांपकर कार्यकर्ताओं को राम मंदिर मुद्दे पर पार्टी का रुख बताते हुए शीघ्र निर्माण का भरोसा दिया। अरसे बाद भीड़ के बीच जय श्रीराम के उद्घोष में शाह ने मंदिर मसले को लटकाने का ठीकरा विपक्षियों के सिर फोड़ा। शाह ने केंद्र और प्रदेश सरकार के प्रयासों का जिक्र करके इस मामले में भाजपा की गंभीर छवि पेश की। कभी भाजपा की हर सभा और रैली में गूंजने वाला यह नारा कुछ देर पहले तक बूथ अध्यक्ष सम्मेलन से बिल्कुल गायब था, लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ ने संबोधन में कार्यकर्ताओं का अभिवादन इसी से किया तो इसके बाद यह नारा गूंजने लगा।
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राम मंदिर चुनावी मुद्दा नहीं मिशन
सीएम योगी आदित्यनाथ के गुरु महंत अवेद्यनाथ से लेकर उनके गुरु दिग्विजयनाथ तक राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं। महंत दिग्विजयनाथ के समय से इस मामले में शुरू हुई गोरक्षपीठ की सक्रियता को उनके शिष्य अवेद्यनाथ ने इतनी ऊंचाई प्रदान की कि वह राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रणेता माने जाने लगे। लोगों का मानना है कि 1989 में प्रयागराज की धर्मसंसद में दिया गया उनका भाषण 1992 के आंदोलन की नींव बना। उनके जाने के बाद योगी आदित्यनाथ ने इसे और आगे बढ़ाया। विभिन्न मंचों पर वह राम मंदिर के लिए आवाज उठाते रहे हैं। सीएम बनने से पहले वह कह चुके हैं कि राम मंदिर मेरे लिए चुनावी मुद्दा नहीं... मेरे लिए जीवन का मिशन है।
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