छापेमारी में बरामद हुईं शराब की बोतलें
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सेवरही। शराब कांड का शिकार जवहीदयाल गांव के खलवा चैनपट्टी का हीरालाल विचारों से वाकई गांव का हीरा थे। गांव के लोग बताते हैं कि वह साइकिल से घूमकर गुब्बारे और खिलौने बेचने का काम करता थे। इलाके के दर्जनों गांवों के बच्चे उन्हें जानते थे। रोते बच्चों को हंसाने के लिए वह कभी-कभी मुफ्त में खिलौने और गुब्बारे हाथ में थमाकर आगे निकल जाते थे। उनकी इसी आदत पर लोग उन्हें गांव का हीरा बता रहे थे। अब दूसरों के आंसू पोंछने वाले का परिवार बिलख रहा है।
तीन दिन से नहीं जले चूल्हे
सेवरही। शराब कांड में मरने वालों से ज्यादा उनके परिजनों को त्रासदी झेलनी पड़ रही है। तीसरे दिन भी घरों के चूल्हे बुझे हुए हैं। वहीं माताओं की आंखों में औलाद के खोने का गम और दहशत दिख रही थी। खैरटिया गांव की सुनैना देवी के दो बेटे दिवाकर और ओम एक दिन के अंतराल में ही काल के गाल में समा चुके हैं। उनकी मानें तो बृहस्पतिवार को डीएम ने जब दस हजार रुपये का अनुदान दिया तो कफन और दवा का किसी तरह इंतजाम हो पाया।
कटहवा नाम है उस जहर का
सेवरही। सस्ते दाम पर बिकने वाली शराब ‘कटहवा’ के नाम से जानी जाती है। जानकारों की मानें तो यह हर गांव में आसानी से सुलभ है, जिसे रात्रि के समय लग्जरी वाहनों में भरकर गांवों के विभिन्न ठिकानों पर पहुंचा दिया जाता है।
सस्ती होने से मजदूर वर्ग इसे खरीदता है। इसे गांवों के किनारे खेत और नदी के दोआब में छिपाकर रखा जाता है। सूत्र बताते हैं कि सैकड़ों की संख्या में लोग इस अवैध धंधे में हैं। दो तरफ सरहद होने से रोजाना नारायणी नदी के रास्ते नाव से यह शराब बिहार भेजी जाती है। इतना ही नहीं जब कभी प्रतिबंध के लिए अभियान चलाया जाता है तो कई जिम्मेदार लोग छापेमारी से पूर्व ही इशारा कर स्थान बदलवा देते हैं। इस तरह धंधेबाज कार्रवाई से अक्सर बच निकलते हैं।