गोरखपुर। नगर निगम, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और उद्योग विभाग ने नालियों को चोक करने वाले पॉलिथीन, प्लास्टिक उत्पाद और थर्मोकोल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गीडा की ऐसी तीन फैक्ट्रियों की बंदी का आदेश जारी किया है।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी घनश्याम ने बताया कि गीडा की फैक्ट्रियों की जांच में तीन को प्रतिबंधित पॉलिथीन का उत्पादन करते हुए पाया गया था। इनमें पूर्वांचल ग्रामोद्योग, क्वेटा प्लास्टिक उद्योग और एमवी इंडस्ट्रीज शामिल हैं।
इन तीनों की बंदी का आदेश जारी कर दिया गया है। इस आदेश के बाद इन फैक्ट्रियों ने पॉलिथीन का उत्पादन बंद कर दिया है। हालांकि पॉलिथीन उत्पादन की किसी भी आशंका को समाप्त करने के लिए इन फैक्ट्रियों का बिजली कनेक्शन कटवाने की कार्रवाई की शुरू कर दी है। इस संबंध में डीएम को पत्र लिखा गया है। अनुमति मिलते ही इन फैक्ट्रियों का बिजली कनेक्शन काट दिया जाएगा।
प्रदेश में किसी भी कंपनी को लाइसेंस नहीं
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी ने बताया कि पूरे प्रदेश में पॉलिथीन उत्पादन संबंधी किसी भी कंपनी के पास लाइसेंस नहीं है। प्लास्टिक, पॉलिथीन, थर्मोकोल पर प्रतिबंध संबंधी नया शासनादेश का इंतजार किया जा रहा है। उसके बाद अन्य कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी। 15 जुलाई तक शासनादेश जारी हो जाने की उम्मीद है।
तीन चरणों में प्रतिबंधित होंगे पॉलिथीन और थर्मोकोल
शासन ने पॉलिथीन और थर्मोकोल पर प्रतिबंध के लिए क्रमवार तीन तारीख तय की है। 15 जुलाई तक 50 माइक्रोन तक उत्पादन करने वाली फैक्ट्रियों के अलावा उनके भंडारण और खरीद-बिक्री पर रोक लगा दी जाएगी। 15 अगस्त की तारीख थर्मोकोल से बनने वाले उत्पाद प्रतिबंधित कर दिए जाएंगे। दो अक्टूबर से थर्मोकोल और प्लास्टिक के अन्य सभी उत्पाद, जैसे प्लास्टिक के कप-प्लेट, गिलास, पैकेजिंग मैटेरियल वाले प्लास्टिक सीट पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लग जाएगा। कार्रवाई के तहत जुर्माना से लेकर कैद का भी प्रावधान किया गया है।