गोरखपुर। रेल कर्मचारियों की बायोमेट्रिक हाजिरी अफसरों की लापरवाही की भेंट चढ़ गई है। करीब 30 लाख रुपये खर्च कर दफ्तरों में मशीनें तो लगा दी गईं लेकिन न ही कर्मचारियों की अंगुलियां स्कैन की गईं और न ही उनका ब्योरा फीड किया गया। इस्तेमाल न होने से ज्यादातर मशीनें खराब भी हो चुकी हैं। महाप्रबंधक के निर्देश पर भी अफसर नहीं चेते और अब भी हस्ताक्षर या अंगूठे से ही रेलकर्मी हाजिरी लगा रहे हैं।
दफ्तरों में देर से आने और जल्द चले जाने की शिकायतों के बाद रेलकर्मियों की बायोमेट्रिक हाजिरी की योजना पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने तकरीबन दो साल पहले बनाई। गोरखपुर मुख्यालय की अधिकांश शाखाओं में डेढ़ साल पहले ही बायोमेट्रिक मशीनें लगा दी गईं। तीनों मंडलों लखनऊ, वाराणसी और इज्जतनगर के ज्यादातर दफ्तरों में भी मशीनें लग चुकी हैं। लेकिन सिस्टम में कर्मचारियों का डेटा फीडिंग, आधार से लिंकअप और फिंगर प्रिंट का स्टॉलेशन नहीं किया गया है। यह काम कार्मिक विभाग को कराना था, अभी तक कर्मचारियों का ब्योरा ही नहीं जुटाया जा सका है।
500 बायोमेट्रिक मशीनें लगनी हैं
मुख्यालय और तीनों मंडलों में करीब 500 बायोमेट्रिक मशीनें लगनी हैं। इसमें 200 से ज्यादा मशीनें मुख्यालय में ही लगेंगी। ज्यादातर दफ्तरों में मशीनें लगाई जा चुकी है।
40 लाख से अधिक का खर्च
मुख्यालय और मंडलों में लगाई जा रही बायोमेट्रिक मशीनों पर करीब 40 लाख रुपये का खर्च है। सूत्रों की मानें तो एक मशीन की कीमत करीब 5 हजार रुपये है। 500 मशीनें लगनी हैं, इस हिसाब 25 लाख रुपये की मशीनें ही लगेंगी। इंस्टॉलेशन, वायरिंग का खर्च अलग से है। कुल मिलाकर करीब 40 लाख रुपये खर्च होंगे।
इंस्टॉलेशन का काम बाकी है। इसमें आधार कार्ड के अंतिम चार अंक को फीड करना है। विभागों से कर्मचारियों का आधार कार्ड को ब्योरा नहीं आया है। अधूरे काम को कराकर जल्द बायोमेट्रिक हाजिरी शुरू कराई जाएगी।
- संजय यादव, सीपीआरओ, एनईआर