पेशेंट एजुकेशन और गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब की ओर से बुधवार को प्रेस क्लब में क्रॉनिक ऑस्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) दिवस मनाया गया। इस मौके पर एमडी चेस्ट डॉ. चेतन कुमार नेमानी ने मनीष चौधरी और देवेश कुमार के साथ 150 मरीजों के फेफड़ों की जांच की।
डॉ. चेतन ने बताया कि दुनिया में बीमारी से होने वाली मौतों का चौथा सबसे बड़ा कारण सीओपीडी है। भारतीय महिलाओं में इसके प्रसार की वजह चूल्हे पर खाना पकाना है। बढ़ते वायु प्रदूषण से अब सिगरेट न पीने वाले भी इसकी जद में आ रहे हैं। मच्छर रोधी अगरबत्ती जलाकर सोने की आदत भी हमें सीओपीडी से पीड़ित कर रही है। पुणे में हुई एक रिसर्च में सामने आ चुका है कि एक मच्छर रोधी अगरबत्ती 100 सिगरेट के बराबर नुकसानदायक है। डॉ. चेतन ने बताया कि स्पायरोमीटर जांच और पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट से सीओपीडी का पता चलता है। बुधवार को इन्हीं दोनों जांचों से मरीजों की जांच की गई।
डॉ. नेमानी ने सीओपीडी पर अंकुश के लिए जागरूकता की जरूरत बताई। कहा कि खांसी, बलगम, सांस फूलने की समस्या गंभीरता से लें। इससे पहले प्रेस क्लब अध्यक्ष मार्कंडेय मणि त्रिपाठी ने निशुल्क जांच शिविर की औपचारिक शुरुआत की। उपाध्यक्ष डीएन दुबे, महामंत्री महेश्वर मिश्र, कोषाध्यक्ष जगदंबा त्रिपाठी, अशोक चौधरी, पुरुषोत्तम राय, मनीष मिश्र, नरेंद्र राय, अनुज मिश्र आदि ने शिविर संचालन में सहयोग दिया।
बीआरडी के चेस्ट विभाग में हुआ जागरूकता व्याख्यान
सीओपीडी दिवस पर बीआरडी के चेस्ट विभाग के अध्यक्ष डॉ. अश्विनी मिश्र के नेतृत्व में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें डॉ. अश्विनी मिश्र ने खांसी, बलगम, सांस फूलने जैसी समस्या को हल्के में न लेने की सलाह दी। उन्होंने मरीजों की जांच की और उन्हें जरूरी परामर्श दिए। कार्यक्रम में विभाग के सभी चिकित्सकों एवं कर्मचारियों का सहयोग रहा।
जागरूकता रैली निकाली
विश्व सीओपीडी दिवस पर बुधवार को अस्थमा एलर्जी सेंटर बेतियाहाता से डॉ. नदीम अर्शद के नेतृत्व में जागरूकता रैली निकाली गई। इसमें मरीज, स्टाफ के साथ एमआर ने हिस्सा लिया। रैली क्लिनिक से बेतियाहाता पेट्रोल पंप होते हुए गोलघर की ओर गई। इसके बाद फिर क्लिनिक पहुंचकर इसका समापन हुआ। इसके बाद डॉ. नदीम अर्शद ने व्याख्यान के दौरान बीमारी के कारणों की जानकारी दी।