गोरखपुर।
बाढ़ पीड़ितों को बीमारियों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पूरी ताकत झोंक दी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में छह नए अस्थायी अस्पताल खोले गए हैं। इसके साथ जिले में अस्थायी अस्पतालों की संख्या बढ़कर 12 पहुंच गई है। एक और जगह अस्थायी अस्पताल खोलने का सीएमओ डॉ. रवींद्र कुमार ने आदेश दिया है।
अस्थायी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टर, फार्मासिस्ट समेत अन्य स्वास्थ्य कर्मी तैनात किए हैं। यहां परामर्श के साथ दवाओं की भी व्यवस्था की गई है। इनमें से हर अस्पताल पर औसतन 250 से 300 मरीज पहुंच रहे हैं। मोहरीपुर प्रथामिक विद्यालय, महुआतर, बरहीं, महराजगंज एडिशनल पीएचसी, करमहा, पाली, अजवनिया, मछरिया पुल के पास आदि स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग ने अस्थायी अस्पताल बनाए हैं। इसके साथ ही नौसड़ के कलानी बुजुर्ग में सीएमओ ने अस्थायी अस्पताल खोलने के लिए आदेश दिया है। बुधवार से यहां भी अस्थायी अस्पताल संचालित होने लगेगा।
चार एंबुलेंस भी तैनात
डोमिनगढ़ आर्मी राहत कैंप, महराजगंज एडिशनल पीएचसी, महुआतर और नौसड़ कलानी बुजुर्ग में बाढ़ पीड़ितों के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एंबुलेंस लगा रखी है। यहां से सूचना पर एंबुलेंस को मरीजों तक भेजा जा रहा है। एंबुलेंस मरीजों को लेकर अस्थायी अस्पतालों समेत स्थाई अस्पतालों तक लेकर पहुंच रही हैं।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की गाड़ियां भी झोंकीं
बाढ़ पीड़ितों की सेहत की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की आठ गाड़ियों के साथ इस पर तैनात डॉक्टर एवं अन्य स्टाफ को भी सीएमओ ने तैनात किया है। ये गाड़ियां भी प्रशासन एवं अन्य की सूचना पर बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए पहुंच रही है। इन पर दवाएं भी उपलब्ध हैं।
जहां उतर रहा पानी, हो रही फागिंग
पानी उतरने के बाद बाढ़ पीड़ितों में संक्रामक बीमारियां न फैलें, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने फागिंग भी शुरू करा दी है। सीएमओ ने बताया कि जिले के कुछ गांवों में पानी उतरा है। इसके बाद आबादी के बीच नालियों में एंटी लार्वा स्प्रे कराया गया है। इस काम में डीपीआरओ की टीम के साथ स्वास्थ्य कर्मी लगे हुए हैं।
एएसवी समेत अन्य दवाएं उपलब्धता
अस्थायी अस्पतालों समेत जिले की सीएचसी और पीएचसी पर एएसवी (एंटी स्नैक वेनम) समेत अन्य जरूरी दवाओं की उपलब्धता को लेकर सीएमओ लगातार मॉनीटरिंग में जुटे हैं। सीएमओ ने बताया कि दवाएं सभी जगहों पर उपलब्ध हैं। लगभग सभी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में क्लोरीन की गोलियों समेत ब्लीचिंग पाउडर बांटा जा चुका है।