गोरखपुर।
सात अगस्त को नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने के बावजूद मेयर डॉ. सत्या पांडेय रोज की तरह कार्यालय पहुंचीं। अपने चेंबर में बैठीं और लोगों की समस्याएं भी सुनीं। नगर आयुक्त ने इसे गलत ठहराते हुए शासन में पत्र लिखने की बात कही है।
मेयर और नगर आयुक्त के बीच तनातनी बढ़ गई है। नगर आयुक्त की दलीलों को खारिज करते हुए मेयर डॉ. पांडेय मंगलवार को नगर-निगम परिसर स्थित अपने दफ्तर में अपराह्न करीब 3:30 बजे पहुंची। हालांकि मुख्य दरवाजा बंद होने की वजह से उन्हें कुछ देर दरवाजा खुलने का इंतजार करना पड़ा। अपने चेंबर में प्रवेश के बाद अपनी कुर्सी पर बैठीं और लोगों की शिकायतों को सुना। कहा कि शहर की किसी भी समस्या के संबंध लोग उनसे शिकायत कर सकते हैं। इसके साथ ही मेयर डॉ. पांडेय का कहना है कि भले ही नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल खत्म हो जाता हो, लेकिन मेयर अपना कार्यभार अगले मेयर को सौंपता है। लिहाजा अगले मेयर के चुने जाने तक वो मेयर हैं। वहीं नगर आयुक्त प्रेमप्रकाश सिंह ने मेयर के कार्यालय पहुंचने पर असमंजस जताते हुए गलत ठहराया है।
शासन को लिखेेंगे पत्र
मेयर का कार्यकाल सात अगस्त को खत्म हो चुका है। आठ अगस्त को वो कैसे कार्यालय गईं हैं यह कहना मुश्किल हैं। हालांकि यह गलत है, शासन को इस संबंध में पत्र लिखा जाएगा।
- प्रेमप्रकाश सिंह, नगर आयुक्त