गोरखपुर।
करोड़ों रुपये फुंकने के बाद भी शहर की बिजली बेहतर क्यों नहीं हो पा रही है, इसे जानने के लिए बिजली सुधार के लिए हो रहे कामों पर नजर दौड़ाए तो पता चलता है कि इसमें किस कदर की लापरवाही हुई है। एक महत्वाकांक्षी योजना सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्वीजिशन सिस्टम (स्काडा) समाजवादी सरकार ने शुरू की थी। सपा सरकार में 88 करोड़ रुपये से शहर की बिजली सुधार का प्रस्ताव बना। काम शुरू हुआ, लेकिन तय वक्त पर पूरा न होने पर काम अभी जारी है। इसमें कार्यों की गुणवत्ता खराब और जमकर मानकों की अनदेखी हुई है।
एक साल लेट होने के बाद भी अभी तक स्काडा का महज 75 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। यह आंकड़ा सरकारी है। जमीनी सच्चाई कुछ और भी हो सकती है। वहीं स्काडा के जो कार्य हुए हैं उसमें जमकर मनमानी की बातें सामने आई हैं। रामनगर फीडर पर पिछले दिनों स्काडा योजना के तहत पोल गाड़े गए। इसमें मानकों की पूरी तरह अनदेखी हुई है। पोलों के बीच दूरी, उनकी जमीन में गहराई समेत नीचे बनाया गया बेस आदि गड़बड़ है। इसके चलते अभी लाइन चालू होने के पहले ही पोल झुक गए हैं। किसी पोल के नीचे ग्राउटिंग नहीं बनाई गई है। ऐसे ही शहर के अन्य इलाकों में भी खेल हुआ है। कहीं नई लाइन बनाई गई है, लेकिन इसके नीचे गार्डिंग नहीं की गई है तो कहीं नए ट्रांसफार्मर लगाकर बिना ऊर्जीकृत किए ही महीनों से छोड़ दिया गया है। सूत्रों की मानें तो योजना के क्रियान्वयन में हुई लापरवाही के चलते शहर में करीब 150 ट्रांसफार्मर ओवरलोड हैं।
बाहरी क्षेत्रों में ज्यादा परेशानी
शहर का तेजी से विस्तार होने से बाहरी इलाकों में बिजली व्यवस्था कमजोर हुई है। बीते दो सालों में महकमे ने करीब 10 हजार कनेक्शन दिए, लेकिन इस हिसाब से इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं तैयार किया। इसके चलते इन इलाकों में ओवरलोड के चलते लो वोल्टेज की समस्या लोगों को परेशान कर रही है। स्काडा का सही ढंग से क्रियान्वयन न होने से इन इलाकों में परेशानी बनी हुई है।
मानसून की बारिश नहीं सह सकेंगे नए पोल
नियम-कायदों की अनदेखी ऐसी है कि स्काडा के तहत लगाए गए अधिकतर पोल मानसून की बारिश भी नहीं झेल सकेंगे। रामनगर फीडर से जुड़े इलाकों की तरह शहर में कई स्थानों पर स्काडा के तहत लगाए गए पोल अभी से झुक गए हैं। रामनगर के संजय का कहना है कि पोल पर अभी लाइन नहीं दौड़ी है तब भी ये झुक गए हैं। जब इन पर लोड पड़ेगा तो क्या हाल होगा, इसे समझा जा सकता है।
कोट-
स्काडा के कामों मेें लापरवाही की शिकायतें मिली हैं। अभी महज 75 प्रतिशत काम हुआ है, लेकिन ज्यादातर कार्यों का पेमेंट नहीं किया गया है। कार्य की गुणवत्ता से समझौता नहीं होगा, कार्यों की समीक्षा की जाएगी। जहां कार्यदायी संस्था ने खराब काम कराया है, वहां का भुगतान उसे तब मिलेगा जब उसे वह मानक के अनुरूप पूरा कराएगी।
-एके सिंह, अधीक्षण अभियंता महानगर