कपड़ा व्यापार को जीएसटी के दायरे में लाने के विरोध में मंगलवार को थोक कपड़ा बाजार बंद रहा। बुधवार और गुरुवार को भी हड़ताल जारी रहेगी। इस दौरान व्यापारी कमिश्नर और डीएम को ज्ञापन देकर कपड़ा व्यापार से जीएसटी खत्म करने की मांग करेंगे।
राष्ट्रव्यापी आह्वान पर मंगलवार को व्यापार बंद रखकर व्यापारियों ने माया टाकीज के पास प्रदर्शन किया और कपड़ा व्यापार को जीएसटी के दायरे में लाने का विरोध किया। व्यापारियों का कहना था कि अब तक कपड़े के थोक व्यापारी केवल इनकम टैक्स देते थे, लेकिन जीएसटी में कपड़े की अलग-अलग कैटेगरी में पांच से 12 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान कर दिया गया है।
व्यापारियों ने कहा कि यह अजीब है कि प्रिंटेड साड़ी पर 5 प्रतिशत और इंब्राडरी वाली साड़ी पर 12 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान कर दिया गया है। ऐसे में व्यापारियों के सामने कई तरह की समस्याएं पैदा हो जाएंगी। स्टॉक मैनेज और वाणिज्य कर में रजिस्ट्रेशन को लेकर दुविधा बनी हुई है। बिना रजिस्ट्रेशन माल मंगाने पर उस स्टॉक का क्या होगा, बकाया रकम की वसूली कैसे होगी। इन सभी को लेकर दुविधा बनी हुई है। प्रदर्शन करने वालों में मनीष सर्राफ, बलराम अग्रवाल, शिव कुमार, बद्री अग्रवाल, दिलीप मल्होत्रा, निर्मल जालान, सुभाष अग्रवाल, अमित मसकरा, संजय अग्रवाल आदि शामिल रहे।
व्यापारियों के सामने दिक्कत
- व्यापारियों को कंप्यूटर, कंप्यूटर ऑपरेटर, अकाउंटेंट रखना मजबूरी होगी।
- ग्रामीण इलाकों में बिजली की किल्लत से बिक्री, स्टॉक का पूरा ब्योरा अपडेट कर पाना मुश्किल होगा।
- थोक व्यापारियों का काफी काम उधार पर चलता है। ऐसे में माल बिकने संबंधी जानकारी मिलने को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी।
- माल कब बिकेगा। आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) का लाभ कैसे मिलेगा।
- सूती, प्रिंटेड, इंब्राडरी साड़ियों के अलग-अलग स्टॉक का डाटा रखना होगा। यह काफी मुश्किल होगा।
महंगे हो जाएंगे कपड़े
कपड़े अभी से महंगे हो गए हैं। पांच से आठ प्रतिशत ज्यादा कीमत पर माल खरीदना पड़ रहा है। ऐसे में बिक्री भी बढ़ी कीमतों के आधार पर करना होगा। यह सब तो ठीक है, लेकिन दिक्कत टैक्स की पेचीदगी को लेकर है।
- रवि अग्रवाल, कपड़ा व्यापारी
कपड़ा व्यवसाय से हटाया जाए जीएसटी
जीएसटी कपड़ा व्यवसाय के लिए गले की फांस है। हमें टैक्स चुकाने में किसी तरह की दिक्कत नहीं है, लेकिन जिस तरह की पेचीदगियां हैं, उससे काफी परेशानी होनी है। सरकार कपड़ा व्यवसाय से जीएसटी हटाए।
- राजेश नेभानी, अध्यक्ष, थोक वस्त्र व्यापारी
छोटे व्यापारियों का कारोबार खत्म हो जाएगा
जब से देश आजाद हुआ है, तब से आज तक कई सरकार आईं और गईं। उन्होंने कपड़ा व्यवसाय को टैक्स के दायरे से बाहर रखा। वर्तमान सरकार का यह कदम छोटे कारोबारियों के व्यापार को खत्म कर देगा।
- राधा रमन जायसवाल, थोक एवं फुटकर विक्रेता
सरकार एक टैक्स कर दे
किसी चीज के लिए पांच प्रतिशत तो किसी के लिए 12 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान काफी गफलत भरा होगा। सब मेंटेन कर पाने में काफी मुश्किल होगी। सरकार एक टैक्स निर्धारित कर दे।
- दिलीप मल्होत्रा, थोक वस्त्र व्यापारी