अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। कौवाबाग रेलवे क्रासिंग पर अंडरपास निर्माण में एक बार फिर इस्टीमेट बाधा बनी है। दूसरी बार निकाले गए टेंडर में सिर्फ एक आवेदक ने 35 फीसदी अधिक इस्टीमेट पर टेंडर डाला है। अब रेल प्रशासन तीसरी बार टेंडर निकालने की तैयारी कर रही है। अगर इस बार भी टेंडर फाइनल नहीं हुआ तो पूरी कार्य की नये सिरे से इस्टीमेट बनाना पड़ेगा।
अंडरपास बनाने के लिए रेलवे बोर्ड ने पिछले वर्ष 16 करोड़ रुपये अवमुक्त कर दिया। लेकिन सवा साल बीतने पर भी निर्माण के लिए टेंडर फाइनल नहीं हो सका है। पहली बार निकाले गए टेंडर में कोई कार्यदायी संस्था सामने नहीं आई। दूसरी बार एक आवेदक ने ओपन टेंडर में भाग लिया लेकिन तय इस्टीमेट से 35 फीसदी दर थी। रेलवे ने टेंडर को निरस्त कर दिया। विभाग के जानकारों की माने तो अगर तीसरी बार भी कोई आवेदक तय दर के हिसाब से नहीं आता है तो निर्माण कार्य और लागत की फिर से समीक्षा करनी पड़ेगी। इसके लिए एक कमेटी बनेगी जो नया इस्टीमेट बनाकर रेलवे बोर्ड को भेजेगा। ऐसे में लागत तो बढ़ेगी ही देरी भी होगी। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी संजय यादव का कहना है कि अंडरपास के टेंडर को जल्द फाइनल करा लिया जाएगा। इसके बाद तेजी से कार्य शुरू होगा।
गलत बनी थी इस्टीमेट
गोरखपुर। अंडरपास में आने जाने के लिए अलग-अलग रास्ते बनेंगे। इसमें दो बैरल बनेंगे। मोहद्दीपुर की ओर से एक सर्विस लेन भी बनेगा। इसके इस्टीमेट बनाने में लापरवाही बरती गई और टेंडर निकाल दिया गया। तकनीकी खामी पता चलने के बाद दोबारा इस्टीमेट बनाकर टेंडर निकाला गया।
पुराने रेट पर काम संभव नहीं
गोरखपुर। रेलवे के निर्माण कार्यों से जुड़े जानकारों का कहना कि निर्माण कार्य में तीन साल के टेंडर का औसत दर निकाल कर रेट फाइनल होता। ओवरलोडिंग बंद होने से गिट्टी, बालू, सीमेंट, सरिया आदि का दाम काफी बढ़ गया है। इस्टीमेट और बाजार रेट में काफी फर्क है। लिहाजा कोई भी फर्म टेंडर में भाग लेने का इच्छुक नहीं है।