गीडा की 17 फैक्ट्रियों पर बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। प्रदूषित पानी डिस्चार्ज करने पर क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन फैक्ट्रियों को नोटिस जारी किया है। इसके अलावा 155 अन्य औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ भी कार्रवाई की आशंका है। इन फैक्ट्रियों के पास प्रदूषणमुक्त इकाई होने का प्रमाणपत्र नहीं है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की सख्ती के बाद क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने यह कार्रवाई की है। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा इन सब की रिपोर्ट एनजीटी में लगाई जाएगी।
गीडा की कई फैक्ट्रियों से निकलने वाला प्रदूषित पानी बिना शोधित हुए सीधे नदी नालों में जाता है। इससे नदियों का पानी प्रदूषित हो रहा है। एनजीटी ने ऐसे इकाइयों पर सख्ती करते हुए स्पष्ट आदेश दिया है कि जिन उद्योगों में ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा है, उन्हें बंद कर दिया जाए। इसके बाद क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सर्वे में गीडा की 17 ऐसी फैक्ट्रियां मिली हैं। क्षेत्रीय अधिकारी एसबी सिंह ने बताया कि इन सभी फैक्ट्री मालिकों को नोटिस जारी किया गया है। इनकी रिपोर्ट मुख्यालय को भी भेजी गई है। जल्द ही कुछ और फैक्ट्रियों का भी सर्वे किया जाएगा। उन्होंने बताया कि चुनाव की वजह से सात मार्च को एनजीटी में व्यक्तिगत तौर पर पेश नहीं हो सके। अगली तारीख निर्धारित करने का कोर्ट से निवेदन किया गया है।
दो इंडस्ट्रीज में ट्रीटमेंट प्लांट के बाद भी पॉल्यूशन
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी एसबी सिंह ने बताया कि दो औद्योगिक इकाइयां तो ऐसी मिली हैं, जिनमें ट्रीटमेंट प्लांट लगने के बावजूद उनके द्वारा डिस्चार्ज किया जा रहा पानी प्रदूषित है। इसके खिलाफ भी बोर्ड को रिपोर्ट भेजी गई है।
इन्हें भेजा गया है नोटिस
नांगलिया फूड इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, मॉडर्न लेमिनेटर्स, अंबे इंडस्ट्रीज, एवन कार्ड बोर्ड इंडस्ट्रीज, नेशनल प्लास्टिक इंडस्ट्रीज, भारत इंडस्ट्रीज, इंडिया टैंकर्स, नेशनल पेट्रोलियम यूनिट, महेश्वरी फूड्स प्राइवेट लिमिटेड, कात्यायनी इंडस्ट्रीज, जेके फूड एवं वेवरेज, तन्मय इंडस्ट्रीज, महालक्ष्मी इंडस्ट्रीज, आयान प्रोडक्ट्स, विराज फाइवर, रुंगटा इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड।
गीडा सीईओ के सामने रखा पक्ष
चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष आरएन सिंह ने बताया कि गीडा की 20 इकाइयों के खिलाफ क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से नोटिस भेजा गया है। इससे उद्योगों के बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। इसके खिलाफ गीडा सीईओ से मिलकर पक्ष रखा गया है।