जेनिफर डाफेन बॉल बहू एवं शुभचिंतक के साथ।
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गोरखपुर। कैंपियरगंज का नाम जिस अंग्रेज अफसर विलियम कैंपियर हार्गल्स के नाम पर पड़ा, उनकी पोती जेनिफर डाफने बॉल शनिवार को गोरखपुर पहुंचीं। वह अपने बेटे और बहू के साथ रविवार को दादा समेत 11 पुरखों की कब्र पर फूल चढ़ाने के लिए पैडलेगंज ग्रेवयार्ड जा सकती हैं।
इंग्लैंड में रहने वाली जेनिफर का बचपन मां सिंथिया मार्स के साथ कैंपियरगंज क्षेत्र के नेतवर कोठी में बीता था। 76 वर्षीय जेनिफर डाफने बॉल इससे पहले 2017 और 2018 में भी गोरखपुर आ चुकी हैं। जेनिफर ने बताया कि भारत में उनके दादा के नाम पर आज भी काफी जमीन है। मां की नेतवर में जागीर है। यहां से जुड़ी यादें कभी भुला नहीं सकतीं। ये यादें हमेशा खुशनुमा रहें इसके लिए वह यहां गरीबों के लिए स्कूल और हॉस्पिटल खोलना चाहती हैं। लेकिन तीन साल से वरासत का मुकदमा लटका पड़ा है। वह गोरखपुर में दादा से जुड़े रहे संत प्रसाद के पोते शिशिर श्रीवास्तव ‘मुकुल’ के इलाहीबाग स्थित घर पर ठहरी हैं। शिशिर ने बताया कि इस बार भी उन्हाेंने कैंपियरगंज और नेतवर भ्रमण की इच्छा जताई है।