गोरखपुर। जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण के तहत क्लाइमेट सेल का गठन एवं जलवायु परिवर्तन से जुड़ी कार्यशाला सिविल लाइंस स्थित एक होटल में शुक्रवार को हुई। इसमें विशेषज्ञों ने गोरखपुर की आबोहवा को काफी खतरनाक बताया। कार्यशाला में इसे बड़ी समस्या बताने के साथ ही इससे निपटने पर भी चर्चा हुई।
राज्य आपदा प्रबंध प्राधिकरण (एनडीएमए) के उपाध्यक्ष सेवानिवृत्त ले. जनरल रविंद्र प्रताप शाही ने कहा कि जलवायु परिवर्तन गंभीर समस्याओं में एक है। इसकी वजह से ही प्राकृतिक आपदाओं की मार झेलनी पड़ रही है। तापमान में लगातार वृद्धि से विषाणुओं, जीवाणुओं विशेष कर मच्छरों की संख्या बढ़ी है।
जलवायु परिवर्तन के लिहाज से गोरखपुर अति संवेदनशील है। उपाध्यक्ष ने कहा कि गोरखपुर का रामगढ़ताल प्रकृति को तोहफा है जिसे आने वाली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखना जरूरी है। इस दौरान एनडीएमए के पीडी बलवीर सिंह, अदिति उमराव, यूनीसेफ लखनऊ की डॉ उर्वशी चंद्रा, जिला आपदा कार्यालय के गौतम गुप्ता समेत कई ने अपने विचार व्यक्त किए।
क्लाइमेट सेल के लिए जिला प्रशासन की प्रशंसा
एनडीएमए के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि गोरखपुर, प्रदेश का पहला जिला है जहां क्लाइमेट सेल का गठन किया गया है। इसे स्थापित करने पर जिला प्रशासन की प्रशंसा की जानी चाहिए। डीएम के. विजयेन्द्र पांडियन ने बताया कि जिले में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए ही पाइलेट परियोजना के रूप में क्लाइमेट सेल का गठन किया गया। डीएम ने कहा कि कार्यशाला में मिले सुझावों का समावेश करते हुए क्लाइमेट सेल गोखपुर घोषणा पत्र 2018 जारी किया जाएगा।
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सूचनाओं का तैयार हो रहा दस्तावेज
कार्यशाला के दौरान एडीएम (फाइनेंस) विधान जायसवाल ने बताया कि क्लाइमेट सेल को क्रियाशिल किए जाने के लिए प्राधिकरण स्तर पर एक आटोमेटिक वेदर स्टेशन स्थापित किया गया है। सेल संबंधी कार्यों को निस्तारित किए जाने के लिए यूनीसेफ के सहयोग से विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही है। वर्तमान में क्लाइमेट सेल क्रियाशील है व संभावित आपदाओं संबंधी महत्वपूर्ण सूचनाआें को अद्यतन कर उनका दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। साथ ही प्राप्त होने वाली जरूरी सूचनाओं को संबंधित विभागों को भी भेजा जा रहा।