गोरखपुर। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) बिल के विरोध में शनिवार को प्राइवेट डॉक्टर हड़ताल पर रहे। आईएमए के आह्वान के समर्थन में धिक्कार दिवस मनाते हुए डॉक्टरों ने सुबह छह से शाम छह बजे तक क्लीनिक, पैथॉलोजी सेंटर बंद रखा। इस दौरान कई मरीजों को लौटना पड़ा। हालांकि गंभीर हालत वाले और नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों का डॉक्टरों ने उपचार किया। सीतापुर आई हास्पिटल में शनिवार की सुबह बैठक हुई। इसमें डॉक्टरों ने बिल पर अपनी राय जाहिर की। आईएमए गोरखपुर शाखा के अध्यक्ष डॉ. जेपी जायसवाल ने कहा कि एनएमसी बिल गरीब विरोधी, लोक विरोधी, अलोकतांत्रिक है।
इस बिल के माध्यम से केंद्र सरकार समस्त अधिकारों को केंद्रीकृत कर अपने पास रखना चाहती है। सचिव डॉ. आरपी शुक्ला ने कहा कि मनोनीत सदस्यों के कारण एनएमसी बिल में राज्य का प्रतिनिधित्व नगण्य हो गया है। डॉ. वीएन अग्रवाल ने कहा कि इस बिल में निजी मेडिकल कॉलेजों और डीम्ड विश्वविद्यालयों में मैनेजमेंट कोटा 15 फीसद से बढ़ाकर 50 फीसद किया जाना गलत है। इससे निजी कॉलेजों में 50 फीसदी सीटों पर निजी मेडिकल कॉलेज अपने अनुसार फीस ले सकते हैं। यह प्रावधान आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने से रोकेगा। इस दौरान डॉ. इमरान अख्तर, प्रदेश संयुक्त मंत्री डॉ. आरपी त्रिपाठी, डॉ. अनिल श्रीवास्तव, डॉ. अखिलेश कुमार सिंह, डॉ. बीके सिंह, डॉ. डीके भगवानी, डॉ. केके राय आदि मौजूद थे।
मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स ने समर्थन दिया
गोरखपुर। आईएमए के अगुवाई में हुई हड़ताल का उप्र, उत्तराखंड मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन के सदस्यों ने समर्थन दिया। बैठक कर डॉक्टरों की मांग को सही ठहराया गया। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष राकेश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि नेशनल मेडिकल कमीशन बनाकर सरकार मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की स्वायत्तता को समाप्त कर अपने हाथ में लेना चाहती है। एसोसिएशन के गोरखपुर इकाई के अध्यक्ष संजय कुमार डे, सचिव अखिलेश उपाध्याय, आशीष श्रीवास्तव, मनोज श्रीवास्तव, संतोष आदि उपस्थित थे।