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वोटर बनने के लिए आए 33 हजार आवेदन

Sat, 03 Feb 2018 08:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर।
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समीक्षा बैठक करते कमिश्नर अनिल कुमार। - फोटो : Amar Ujala
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कमिश्नर अनिल कुमार ने शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में निर्वाचन कार्य से जुड़े अफसरों और जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक कर 31 दिसंबर 2017 से एक महीने तक चले पुनरीक्षण अभियान की समीक्षा की। बैठक के बाद उन्होंने सहजनवां, खजनी, बांसगांव और गोला के कुछ बूथों का निरीक्षण भी किया। कमिश्नर इस मतदाता अभियान के प्रेक्षक बनाए गए थे।
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बैठक के दौरान उप जिला निर्वाचन अधिकारी व एडीएम (प्रशासन) प्रभुनाथ ने बताया कि 31 जनवरी तक चले इस अभियान में वोटर बनने के लिए 33,239 आवेदन आए। इनमें 15,426 आवेदन महिलाओं के, जबकि 18 से 19 वर्ष के नए मतदाता बनने के लिए 9,153 आवेदन हैं। वहीं मतदाता सूची से नाम काटने के लिए 24,042 आवेदन आए हैं। यानी अब जिले की विधानसभा की मौजूदा वोटर लिस्ट में करीब नौ हजार वोटर बढ़ जाएंगे। सदर लोकसभा क्षेत्र में आने वाले पांच विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन नौ फरवरी को और बाकी विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची का प्रकाशन 21 फरवरी को होगा। सदर लोकसभा के उपचुनाव की संभावना के मद्देनजर आयोग ने पांच विधानसभा क्षेत्रों के वोटर लिस्ट का अंतिम प्रकाशन पहले करने के निर्देश दिए हैं।

अभियान खत्म पर अब भी बन सकते हैं वोटर
कमिश्नर अनिल कुमार ने बताया कि 31 जनवरी को भले ही मतदाता पुनरीक्षण अभियान खत्म हो गया है, मगर कोई भी पात्र व्यक्ति अब भी वोटर बन सकता है। निर्वाचन कार्यालय से आवेदन पत्र प्राप्त करने के अलावा ऑनलाइन भी आवेदन किया जा सकता है।
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अभियान पर नगर विधायक ने उठाए सवाल
पुनरीक्षण अभियान को सफल बताकर जिला प्रशासन अपनी पीठ थपथपा रहा है, मगर जनप्रतिनिधि का मानना है कि निर्वाचन से जुड़े अफसर, कर्मचारी सिर्फ इसी पुनरीक्षण अभियान नहीं बल्कि हर पुनरीक्षण अभियान में महज खानापूर्ति करते हैं। नगर विधायक डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल ने शनिवार को प्रेक्षक एवं कमिश्नर अनिल कुमार की समीक्षा बैठक में अभियान पर कई गंभीर टिप्पणियां कीं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि शहर विधानसभा क्षेत्र 322 की मतदाता सूची कूड़ेदान की तरह हो चुकी है। हर बार का संक्षिप्त पुनरीक्षण इसको पहले से और खराब कर देता है। नाम पूरी तरह बेतरतीब हैं। यही नहीं नाम, मकानों के क्रम में नहीं हैं और एक ही परिवार के सदस्यों के नाम कई मतदाता सूची में हैं। ऐसे में सघन पुनरीक्षण की जरूरत है। इसी तरह बीएलओ द्वारा चुनाव के वक्त चंद मतदाताओं को ही मतदाता पर्ची बांटी जाती है। उन्होंने सुझाव दिए कि लोकसभा उपचुनाव में मतदाता पर्ची का वितरण ठीक से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मतदान के दिन मतदान केंद्रों पर जो सूची आती है, उसमें बड़ी संख्या में लाल स्याही से नाम काट दिए जाते हैं। नागरिक मतदान केंद्र पर यह देखकर दंग रह जाते हैं कि उनके नाम जबरन काट दिए गए।
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