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एमएमएमयूटी और विज्ञान प्रौद्योगिकी परिषद में करार, अब पूर्वांचल की नई खोज को मिलेगा बेहतर मुकाम

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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्व‌विद्यालय। - फोटो : Amar Ujala
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गोरखपुर। गोरखपुर और आसपास के जिलों मेें होने वाले रिसर्च और नई खोज को अब और भी बेहतर मुकाम मिल सकेगा। इसे लेकर एमएमएमयूटी और विज्ञान प्रौद्योगिकी परिषद लखनऊ के बीच बुधवार को करार हुआ। करार के मुताबिक नए खोजकर्ता को जहां उसकी खोज का श्रेय मिलेगा। वहीं जरूरत पड़ने पर आर्थिक मदद भी मुहैया कराई जाएगी। यह समझौता एक साल के लिए प्रभावी होगा।
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एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. एसएन सिंह ने बताया कि दोनों संस्थाएं अनुसंधान, उत्पाद नवीनता और शोध कार्य को निखारने, नई खोज को बढ़ावा देने के मकसद से परस्पर सहयोग करेंगी। करार के मुताबिक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद गोरखपुर और आसपास के जिलों में ऐसे खोजकर्ताओं की सूची तैयार करेगा, जिन्हें निखारने और संवारने की जरूरत है। उसके बाद इन्क्यूबेशन सेंटर की मदद से नई खोज का प्रोटोटाइप डिजाइन और संबंधित खर्च को तैयार कर परिषद को भेजेगा। प्रोजेक्ट की स्वीकृति मिलने पर परिषद की नवप्रर्वतन विकास समिति संभावित व्यय का 50 प्रतिशत खर्च आरटीजीएस के माध्यम से एमएमएमयूटी को देगा। शेष 50 प्रतिशत राशि पूर्व में दिए अनुदान के 80 प्रतिशत काम पूरा होने पर दिया जाएगा।
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