कुशीनगर। वाल्मीकि बैराज से बड़ी गंडक नदी में पानी का डिस्चार्ज घटने से जलस्तर चेतावनी बिंदु से नीचे आ गया है। इससे नदी उस पार बसे मरचहवा, बसंतपुर सहित अन्य गांवों से बाढ़ का पानी निकल गया है, लेकिन सड़कों में बने गड्ढों में पानी अभी भी भरा है। जलस्तर कम होने के बाद भी खतरा बना हुआ है।
बड़ी गंडक के किनारे बसे गांवों में हर साल बाढ़ का खतरा मंडराता रहा है। यह स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है, जबकि बड़ी गंडक के जलस्तर में वृद्धि होती है। जलस्तर बढ़ने पर बड़ी गंडक के उस पार बसे मरचहवा, बकुलादह, शिवपुर सहित कुशीनगर और बिहार के कई गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने की चिंता सताने लगती है। जलस्तर बढ़ने पर उन्हें अपने मवेशियों के साथ ऊंचे स्थानों पर शरण लेनी पड़ती है। ऐसी ही स्थिति चार दिन पहले उत्पन्न हो गई थी, जब बड़ी गंडक नदी का डिस्चार्ज सवा दो लाख तक पहुंच जाने से जलस्तर बढ़ गया था। जिससे खड्डा क्षेत्र के मरचहवा और बसंतपुर सहित आसपास के अन्य गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया था। हालत यह हो गई थी कि इन गांवों की सड़कों पर भी नाव से लोगों को आना-जाना पड़ रहा था।
रविवार की सुबह आठ बजे नदी का डिस्चार्ज एक लाख सैतालिस हजार पांच सौ क्यूसेक पर आ गया, जिसमें शाम चार बजे आंशिक बढ़त दर्ज की गई। डिस्चार्ज एक लाख बावन हजार नौ सौ क्यूसेक था। इस वजह से भैसहां गेजस्थल पर जलस्तर चेतावनी बिंदु से दो सेंटीमीटर नीचे 94.98 मीटर था। जलस्तर में कमी के चलते नदी उस पार के मरचहवा और बसंतपुर सहित अन्य गांवों में घुसा बाढ़ का पानी बाहर निकल गया है। हालांकि अभी खतरा बरकरार है। मरचहवा-बसंतपुर मार्ग व बसंतपुर-सोहगीबरवा मार्ग पर बाढ़ का पानी कम हो गया है, लेकिन सड़क के गड्ढे में अभी भी पानी भरा है।
उधर, तमकुहीराज तहसील क्षेत्र के पिपराघाट के पुरवों के लोगों को अब भी बहुत ज्यादा राहत नहीं मिल पाई है। तमकुहीराज के विधायक अजय कुमार लल्लू ने रविवार को बाढ़ से प्रभावित इलाकों का नाव से भ्रमण कर जायजा लिया।