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फॉलोअप---- अवैध कॉलोनी

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अवैध कॉलोनियों को वैध करने में जुटा जीडीए
एक मई 2016 के पहले विकसित कालोनियां ही होंगी वैध
कॉलोनी वालों को भी आना होगा आगे, बनानी होगी सोसाइटी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। शहर की अवैध कॉलोनियों को वैध करने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। एक मई 2016 से पहले बसी कॉलानियों को पहले चिह्नित किया जाएगा फिर उन्हें वैध करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इन कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को भी अवैध कॉलोनी का दाग धुलने के लिए आगे आना होगा। उन्हें सोसाइटी बनानी होगी और फिर अपनी कॉलोनी का ले-आउट तैयार कराने के लिए प्राधिकरण में आवेदन करना होगा। ले-आउट तैयार होने के बाद ही जीडीए शमन शुल्क आदि का निर्धारण कर सकेगा जिसके बाद ये कॉलोनियां वैध हो सकेंगी।
शासन ने भी हाल ही में फिर से अवैध कालोनियों की सुधि ली है। कैबिनेट ने प्रस्ताव पास कर एक मई 2016 से पहले विकसित हुई अवैध कॉलोनियों को वैध करने के लिए प्राधिकरणों को निर्देश जारी किया है। जीडीए के अफसरों का कहना है कि अभी इस संबंध में निर्देश तो नहीं मिला है लेकिन तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। रिमोट सेंसिंग सिस्टम के जरिए एक मई 2016 के पहले विकसित कालोनियों का मानचित्र जुटाया जा रहा है। जीडीए द्वारा शहर में अब तक 25 अवैध कालोनियां चिह्नित की गई है। सभी कालोनियां कृषि भू उपयोग, पीएसी के लिए आरक्षित पार्क और सामुदायिक भू-उपयोग वाली जमीनों पर बसीं हैं। हालांकि वास्तविक संख्या 70 के करीब होने की उम्मीद है। वैध नहीं होने की वजह से संबंधित कॉलोनियों में एक बार बनी सड़क या बिजली, पानी की व्यवस्था खराब होने के बाद प्राधिकरण या निगम उन्हें सही नहीं कर पाता।
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ये कॉलोनियां हैं अवैध
झरना टोला, मौर्या टोला, नंदानगर, ईस्टनपुर, गायत्री नगर, लालगंज, सैनिक कुंज, सैनिक विहार विस्तार, शक्तिनगर, साकेत नगर, सिद्धार्थनगर, सुलभ कालोनी, राजीव नगर, पार्वती नगर, विवेकानंदपुरी, श्रीराम नगर कालोनी, आर्यनगर, विवेकानंद नगर, आदर्शनगर, विवेक नगर, शांति नगर, मुलायम नगर, गोरक्षनगरी, महादेवपुरम
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अवैध कॉलोनियों को लेकर शासन की तरफ से अभी नई गाइडलाइन नहीं मिली है। हालांकि पूर्व में जारी गाइडलाइन से बहुत ज्यादा बदलाव नहीं किया गया है। प्राधिकरण की तरफ रिमोट सेंसिंग सिस्टम से एक मई 2016 के पहले की कॉलोनियों के मानचित्र जुटाए जा रहे हैं। इसके बाद इनके ले-आउट तैयार करने और फिर शमन शुल्क आदि जमा कराने की कवायद की जाएगी। - संजय कुमार सिंह, मुख्य अभियंता, जीडीए
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