गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय में इसी सत्र से चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) पाठ्यक्रम लागू होगा। बुधवार को विद्या परिषद की बैठक में सर्वसम्मति से मुहर लगा दी गई। इस पाठ्यक्रम के लागू होने से पारंपरिक सेमेस्टर पद्धति, जिसमें कक्षा कार्य, प्रयोगात्मक कार्य और छह-छह माह के अंतराल पर लिखित परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थी का मूल्यांकन होगा। अंकों के स्थान पर ग्रेड मिलेंगे और कोर्स का विभाजन क्रेेडिट के आधार पर होगा। इसके अलावा आंतरिक परीक्षा में होने वाले अभ्यास कार्य, सेमिनार, फील्ड एवं प्रोजेक्ट वर्क भी करने होंगे। रिजल्ट में इसे भी आधार बनाया जाएगा।
प्रशासनिक भवन में कुलपति प्रो. वीके सिंह की अध्यक्षता में संवाद भवन में हुई विद्या परिषद की बैठक में अधिष्ठाता कला संकाय के संयोजकत्व में सभी अधिष्ठाताओं की गठित समिति ने सीबीसीएस अध्यादेश पर विचार किया। उसके बाद सर्वसम्मति से उसे स्वीकार कर लिया गया। कुलपति ने कहा यह बदलाव विद्यार्थियों के लिए काफी लाभदायक होगा।
बैठक में प्रति कुलपति प्रो. एसके दीक्षित, प्रो. हरीशरण, प्रो. जितेंद्र मिश्रा, प्रो. अवधेश तिवारी, प्रो. नरेश प्रसाद गुप्ता, प्रो. रजनीकांत पांडेय, प्रो. राजवंत, प्रो विनोद सिंह, प्रो अजय शुक्ला आदि मौजूद रहे।
सीबीसीएस का कुछ ऐसा होगा ढांचा
सभी परास्नातक पाठ्यक्रम कुल 100 क्रेडिट के होंगे, जो चार सेमेस्टर में समान रूप से विभाजित होकर 25 क्रेडिट प्रति सेमेस्टर होंगे।
प्रत्येक सेमेस्टर में 5-5 प्रश्नपत्र, प्रत्येक कोर्स में 5 क्रेडिट होंगे। प्रश्नपत्र के लिए 50-50 मिनट के पीरियड रखकर यूजीसी गाइड लाइन के अनुसार अधिकतम 90 घंटे में कुल क्रेडिट का लक्ष्य रखा जाएगा।
मौखिकी का अलग से कोई प्रश्नपत्र नहीं होगा। इसकी जगह प्रत्येक प्रश्नपत्र में अभ्यास कार्य, सेमिनार, फील्ड वर्क, प्रोजेक्ट व आंतरिक मूल्यांकन और मौखिकी का प्रावधान होगा।
प्रत्येक प्रश्नपत्र 100 अंकों का होगा, जो 70:30 के अनुपात में लिखित व आंतरिक परीक्षा में विभाजित होगा। लिखित परीक्षा 50 से 100 अंकों के स्थान पर 70 अंकों की व आंतरिक परीक्षा 30 अंकों की हो सकती है।
लिखित परीक्षा वर्तमान प्रश्नपत्र प्रणाली के ही अनुसार 20 अंकों के प्रति प्रश्न के स्थान पर 14 अंकों के प्रति प्रश्न होकर कुल पूर्णांक 70 में से और कुल नौ प्रश्नों में से पहले की ही तरह केवल पांच प्रश्न हल करके प्राप्त किए जा सकेंगे।
मासिक आधार पर होने वाली आंतरिक परीक्षा 30 अंक की होगी।
रुचि के आधार पर चुन सकेंगे कोर्स
रुचि के अनुरूप पढ़ाई नई प्रणाली में मुख्य कोर्स के अलावा विद्यार्थी के पास अपनी रुचि के आधार पर कोर्स चुनने का भी विकल्प होगा। यह तीन श्रेणियों में होगा। पहला कोर इलेक्टिव, यानी मुख्य कोर्स तथा सब इलेक्टिव यानी मुख्य कोर्स के वैकल्पिक प्रश्नपत्र। उसके अलावा तीसरा ओपन इलेक्टिव कोर्स खास है। मसलन, कला संकाय का छात्र विज्ञान अथवा वाणिज्य संकाय का एक विषय भी पढ़ाई के लिए चुन सकता है। पूरा कोर्स अलग अलग यूनिट में बंटा होगा।