पहली बार में ही जीत का परचम लहराकर बने थे एमएलसी
गोरखपुर। डॉ वाईडी सिंह बाल रोग चिकित्सा के क्षेत्र में मशहूर तो थे ही, राजनीति में भी उन्होंने खासा मुकाम हासिल किया। राजनीति में पहला कदम रखते ही वह एमएलसी चुन लिए गए। 2004 में गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद के चुनाव में उन्होंने तत्कालीन एमएलसी को शिकस्त देकर जीत का परचम लहरा दिया था।
हालांकि उनकी कोई खास सियासी पारिवारिक पृष्ठभूमि नहीं थी, पर ससुराल का सियासत से गहरा रिश्ता रहा है। उनके ससुर स्व. हरि प्रसाद शाही जनपद के चर्चित लोगों में एक थे। वह पिपराइच से दो बार विधायक तथा दो बार डिस्टिक बोर्ड वर्तमान में जिला पंचायत के अध्यक्ष थे। तब इसका काफी महत्व हुआ करता था। महावीर प्रसाद जैसे कई लोगों को राजनीति का ककहरा सिखाकर उन्होंने सत्ता के शिखर पर पहुंचाया था। डॉ. सिंह ने उन्हें अपना आदर्श मानकर सियासत में कदम रखा। 2004 के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में तत्कालीन सपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह को शिकस्त देकर उन्होेंने राजनीति में पहला कदम रखा।
डॉ. सिंह का मंदिर से करीबी रिश्ता होने के कारण उनकी नजदीकी भाजपा से भी हो गई। 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने बस्ती से भाजपा से टिकट मांगा। वह मूलरूप से बस्ती के ही रहने वाले थे। उस समय उनके भाई बस्ती में भाजपा के जिलाध्यक्ष थे। योगी की सिफारिश पर उन्हें टिकट मिल गया, वह चुनाव लड़े पर हार गये। 2010 में एमएलसी का उनका कार्यकाल खत्म हो गया और वह दोबारा गोरखपुर- फैजाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से शिक्षक संगठन के प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे। मुकाबले में उनके पुराने प्रतिद्वंदी सपा प्रत्याशी देवेंद्र्र सिंह ही थे। यह चुनाव देवेंद्र सिंह ने जीत लिया। यहीं से डॉ वाईडी सिंह का सियासी सफर थम गया। फिर वह कोई चुनाव नहीं लड़े।
आवारा पशुओं के लिए बनाई थी गौशाला
डॉ सिंह ने पिछले दिनों खुद की तीन एकड़ जमीन पर छुट्टा पशुओं के लिए गौशाला बनाई थी। वह ऐतिहासिक मनोरमा नदी के सफ ाई अभियान से भी जुड़े थे। इन दोनों कामों के सिलसिले में वह जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी विस्तृत कार्य योजना के साथ मुलाकात करने वाले थे।
गांव से जोड़े रहे रिश्ता
काफी व्यस्त होने के बाद भी डॉ सिंह ने अपने पैतृक गांव से रिश्ता जोडे रखा। सक्रिय राजनीति से अलग होने के बाद सप्ताह में दो दिन वह बस्ती स्थित अपने पैतृक गांव में जरूर जाते थे। वहां बच्चों का निशुल्क इलाज करते थे।
डिब्बा बंद दूध बंद करने की पहल की थी
डॉ सिंह चिकित्सा क्षेत्र में स्थापित होने के बाद ऐसे पहले डॉक्टर थे जिन्होंने निशुल्क चिकित्सा कैंप शुरू किया। डॉ वाई डी सिंह लंबे समय तक बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में बाल रोग विभाग के अध्यक्ष रहे। उन्होंने सरकारी सेवा में रहते हुए और सेवानिवृति के बाद भी अपने काम से लोगों के दिलों में अमिट जगह बनाई। सेवाकाल में उनकी अगुवाई में गोरखपुर के बाल रोग विशेषज्ञों ने डिब्बा बंद दूध के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया और हर पर्चे पर छह माह की उम्र तक बच्चों को सिर्फ मां का दूध देने का सुझाव लिखना शुरू किया। इसका डिब्बा बंद दूध के व्यवसाय पर बहुत असर पड़ा था।
सुबह से ही घर पर लग गया लोगों का तांता
गोरखपुर। डॉ वाईडी सिंह के निधन के बाद शनिवार को सुबह उनके बेतियाहाता स्थित आवास पर लोग श्रद्धांजलि देने उमड़ पड़े। उधर, भाजपा कार्यकर्ताओं ने शोकसभा का आयोजन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। भाजपा महानगर गोरखपुर के कार्यकर्ताओं ने बेनीगंज स्थित भाजपा कार्यालय पर शोकसभा कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। महानगर अध्यक्ष राहुल श्रीवास्तव ने कहा कि डॉ वाईडी सिंह सच्चे अर्थों में मानवता के पुजारी थे। इस दौरान देवेश श्रीवास्तव, ओम प्रकाश शर्मा, अच्युतानंद शाही, दयानंद शर्मा, विवेक सरकारी, वीरेंद्र नाथ पांडे, शशिकांत सिंह, राजीव रंजन अग्रवाल, डॉक्टर पशुपतिनाथ सिंह, डॉ शोभित श्रीवास्तव, विनय श्रीवास्तव प्रेम नाथ शुक्ला आदि मौजूद थे। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रजनीकांत पांडेय ने डॉ सिंह के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
विश्वविद्यालय प्राचीन इतिहास विभाग के प्रोफेसर डॉ राजवंत राव ने भी उनके घर जाकर श्रद्धांजलि दी। मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी एसोसिएशन की तरफ से बेतियाहाता स्थित पैथ वर्ल्ड पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई। अध्यक्ष रणजीत गुप्ता ने उनके निधन को अपूर्णनीय क्षति बताया। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के लोगों ने उनके आवास पर जाकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान हेमचंद गिरी, रतन मिश्रा, दिलीप सिंह, अखिलेश गिरी, विजय शर्मा आदि लोग मौजूद थे। डॉ रघुनाथ चंद ने कहा कि ऐसे महान व्यक्ति का निधन सर्वसमाज के लिए अपूर्णीय क्षति है।
बेतियाहाता की पूर्व पार्षद विजय लक्ष्मी शुक्ला ने श्रद्धांजलि सभा बुलाई। इस दौरान निकेत नारायण सेवक पांडेय, पूर्व पार्षद विष्णु कांत शुक्ला, धर्मेंद्र नाथ समेत अन्य लोग मौजूद थे। डॉ राम मनोहर लोहिया पुस्तकालय के सचिव अध्यक्ष सिद्धार्थ प्रिय उपाध्याय ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। नेशनल एजुकेशन सोसाइटी के सचिव व एमजी इंटर कॉलेज के प्रबंधक मंकेश्वर नाथ पांडेय ने शोक जताया। उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ की स्थानीय इकाई ने बेतियाहाता स्थित कैंप कार्यालय पर शोक सभा का आयोजन कर डॉ सिंह को श्रद्धांजलि दी।
भाजपा विधि प्रकोष्ठ की तरफ से क्षेत्रीय संयोजक सत्येंद्र त्रिपाठी की अध्यक्षता में कचहरी में शोकसभा हुई, जिसमें पूर्व एमएलसी डॉ वाईडी सिंह श्रद्धांजलि दी गई। अजय सिंह, सुनील तिवारी, अखिलेंदू श्रीवास्तव, आशुतोष श्रीवास्तव, सत्येंद्र मल्ल, जितेंद्र कुमार मिश्र, हरिप्रकाश मिश्र, विष्ष्णुकांत शुक्ला, नीरज शाही आदि मौजूद थे।
दवा विक्रेताओं ने दुकानें बंद कर दी श्रद्धांजलि
डॉ सिंह के निधन की खबर सुनते ही घर के पास 33 कसया रोड स्थित सभी दवा की दुकानें बंद हो गईं। दवा विक्रेता समिति के महामंत्री आलोक चौरसिया ने कहा कि डॉ वाईडी सिंह ने चिकित्सा क्षेत्र को काफी प्रतिष्ठा दिलाई।
सोशल मीडिया पर भी दी श्रद्धांजलि
गोरखपुर। डॉ वाई डी सिंह के निधन की सूचना के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ वाई सिंह ने उनका फोटो साझा करते हुए लिखा कि सर आप हमेशा हमारे दिल में रहेंगे। आपकी मुस्कान सदैव आपकी याद दिलाती रहेगी। गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ योगेश प्रताप सिंह ने लिखा-डॉ साहब आप हमारे बीच नहीं रहे, आसानी से यकीन नहीं हो रहा। अमित ओझा ने फोटो साझा कर लिखा कि डॉ वाईडी सिंह का निधन पूर्वांचल की अपूर्णनीय क्षति है।
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