- मुख्य सचिव ने 48 घंटे में खामी दुरुस्त करने का दिया अल्टीमेटम
- आयुष्मान भारत के सभी लाभार्थियों को प्लास्टिक-गोल्डेन कार्ड देने को कहा
- वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए शासन की प्रमुख योजनाओं की जांची प्रगति
गोरखपुर। जिले के 10 हजार किसानों की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की दो हजार रुपये की आर्थिक मदद फंस गई है। सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए शासन की प्रमुख योजनाओं की प्रगति जांचने के दौरान प्रदेश के मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय ने 48 घंटे में सभी खामियां दुरुस्त कर डाटा शासन को भेजने का निर्देश दिया।
करीब र्ढाई घंटे तक चली वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान उन्होंने बाकी बचे प्रधानमंत्री आवासों के निर्माण में तेजी लाने और आयुष्मान भारत के सभी लाभार्थियों को अभियान चलाकर प्लास्टिक और गोल्डेन कार्र्ड उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया। कहा कि पालीथिन पर प्रभावी कार्रवाई की जाए। अभियान चलाकर अवैध निर्माण व अतिक्रमण ध्वस्त कराए जाएं। कांफ्रेंसिंग के दौरान कमिश्नर जयंत नार्लीकर, डीएम के. विजयेंद्र पांडियन, जीडीए सचिव राम सिंह गौतम, जेडीसी एए अंसारी समेत संबंधित विभागों के अफसर मौजूद रहे।
क्यों नहीं मिल रही रकम
सत्यापन के बाद जिले की तरफ से भेजी गई किसानों की सूची में किसी के डाटा में गड़बड़ी है तो किसी किसान के खाते, ग्रामीण व सहकारी बैंक में होने से दिक्कत आ रही है। ये दोनों बैंक पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) सॉफ्टवेयर से नहीं जुड़े हैं जबकि योजना के तहत भुगतान इसी सॉफ्टवेयर के माध्यम से हो रहा है।
पीएम आवास बनाने को तैयार नहीं हो रहे ठेकेदार
गोरखपुर। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) को खोराबार में प्रधानमंत्री आवास बनवाने के लिए ठेकेदार नहीं मिल रहे। यह चौथा मौका है जब प्राधिकरण ने पीएम आवास बनवाने के लिए निविदा निकाली है। नौ जुलाई को निविदा खुलेगी। जनवरी से अब तक 1536 आवासों के निर्माण के लिए तीन बार निकाली गई निविदा में किसी ठेकेदार ने आवेदन ही नहीं किया। उधर प्राधिकरण, मानबेला में बन रहे 1536 आवासों के लिए आवेदन लेने के आठ महीने बाद तक उसका आवंटन नहीं कर सका। सोमवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान मुख्य सचिव ने शहर और ग्रामीण क्षेत्र में बचे हुए आवास निर्माण में तेजी लाने का निर्देश दिया।
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