गोरखपुर। देश के साथ ही जिले के भीतर छोटे-बड़े उद्योग की स्थिति और उनके कितने लोग जुडे़े हैं तथा कितने अभी बेरोजगार हैं, उसका आंकलन कर आगे की नीतियां तैयार करने के उद्देश्य से सातवीं आर्थिक गणना इसी महीने से शुरू की जाएगी। यह पहला मौका है जब पूरे देश में पेपरलेस आर्थिक गणना होगी। गिनती के लिए मोबाइल फोन में अपलोड विशेष एप का इस्तेमाल होगा। भारत सरकार के केंद्रीय सांख्यिकीय मंत्रालय ने इस बार आर्थिक गणना कराने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) ई. गर्वनेंस सर्विसेज इंडिया लि. को जिम्मेदारी सौंपी है। ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में प्रगणकों, पर्यवेक्षकों के माध्यम से गणना की जाएगी।
आर्थिक गणना के लिए जिले में कुल 818 सीएससी केंद्र लगाए जाएंगे। प्रत्येक केंद्र की ओर से पांच से 10 प्रगणकों को नियुक्त कर गणना कराई जाएगी, जो पूरी तरह ऑनलाइन व जीयो टैगिंंग के माध्यम से अगले तीन महीने यानी अगस्त में पूरी की जाएगी। परिवारों से जो सूचना प्राप्त होगी, वह गोपनीय रखी जाएगी। इसका उपयोग देश के अर्थ व्यवस्था में विभिन्न क्षेत्रों के योगदान की जानकारी व नीतियां, योजना बनाने में किया जाएगा। प्रगणक घर-घर जाकर परिवार की ओर से संचालित उद्यम, आर्थिक गतिविधियों की जानकारी हासिल करेंगे।
दिया गया प्रशिक्षण
गोरखपुर। आर्थिक गणना से जुड़े सभी लोगों को गुरुवार को विकास भवन सभागार में आयोजित कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षण दिया गया। कार्यशाला में सीएससी ई. गर्वनेंस सर्विसेज इंडिया लि. के स्टेट प्रोजेक्ट मैनेजर अजय प्रकाश चौबे ने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के जरिए गणना से जुड़ी जानकारी दी। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी कार्यालय व एनएसएसओ की ओर से गणना के तकनीकी पहलुओं के बारे में बताया गया।