विश्व थाइरॉयड दिवस आज
दिल की धड़कन तक पर प्रभाव डालता है थाइरॉयड
- प्रत्येक 10 में एक व्यक्ति में होती है इस हार्मोन की अधिकता या न्यूनता
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। थाइरॉयड शरीर की सबसे बड़ी अंत: स्त्रावी ग्रंथि होती है। गर्दन के अगले हिस्से में स्थित इस ग्रंथि से थाइरॉयड हार्मोन निकलता है। इसकी मात्रा से ही यह निर्धारित होता है कि शरीर के ज्यादातर अंग ऊर्जा का किस तरह इस्तेमाल करेंगे। यहां तक थाइरॉयड हार्मोन दिल की धड़कनों तक को प्रभावित करता है। थाइरॉयड हॉर्मोन के शरीर में सामान्य स्तर से कम होने की अवस्था को हाइपोथाइरोडिस्म कहते हैं जब कि दूसरी तरफ इसकी क्रियाशीलता बढ़ने की अवस्था हाइपरथाइरोडिस्म कहलाती है।
डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि विश्व में हर 10 में से एक मनुष्य को थाइरॉयड की समस्या होती है। इसके प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए ही प्रत्येक वर्ष 25 मई को विश्व थाइरॉयड दिवस मनाया जाता है। ताकि लोग इस रोग से भलीभांति परिचित हो जाएं और समय रहते इसे नियंत्रित कर सकें। उन्होंने बताया कि भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, इंडोनेशिया, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड में हाइपोथाइरोइडिस्म के मरीजों की संख्या एवं रोग की गंभीरता अधिक है। महिलाओं में थाइरॉयड के होने की संभावना और भी अधिक होती है। उम्र 35 वर्ष से ज्यादा होने पर कोई भी इस बीमारी की जद में आ सकता है।
- बीमारी के मुख्य कारक
आयोडीन की कमी, पिट्यूटरी ग्रन्थि का अनियमित स्त्राव, सिर और गले के कैंसर की रेडियोथेरेपी होने पर या थायरॉइड ग्रंथि का ऑपरेशन होने पर इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
- बीमारी के सामान्य लक्षण
वजन का बढ़ना, थकान, ठंड ज्यादा महसूस होना, शरीर में सूजन, मासिक धर्म में लंबी या भारी अनिमितता, बांझपन, गर्भ का न ठहरना, रूखी त्वचा, अवसाद, कब्ज, मांशपेशियों में अकड़न, हाथ-पैर का सुन्न होना।
- रोगियों के लिए सलाह
नियमित चिकित्सकीय सलाह लें, दवाओं का निर्देशित समय से सेवन करें, समुचित अंतराल पर थाइरॉयड की जांच कराएं, गर्भावस्था में रोगी निरंतर चिकित्सक देखरेख में रहें, नियमित व्यायाम, फ ल और हरी सब्जियों का अत्यधिक सेवन, जंक फूड और गोभी के सेवन से बचें।