मां और भाई-बहनों की सिसकियां सुनाई देती रहीं।
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सिकरीगंज/कुईं बाजार (गोरखपुर)। उफ! ये क्या...दरवाजे पर छोटी बहन की बारात थी और उसने दुनिया छोड़ दी। शहनाई की जगह चीत्कार ने ले ली। घरवाले ही क्या गांववाले भी इस अनहोनी से कांप गए। किसी तरह शादी की रस्में पूरी की जा सकीं।
वाकया सिकरीगंज के शिवपुर गांव के रघुवीर के घर का है। मजदूरी कर गृहस्थी चलाने वाले रघुवीर का परिवार बृहस्पतिवार बड़े अरमान के साथ बेटी हिमांगी की शादी की तैयारियों में जुटा था। बारात भी आ गई थी। दिनभर की भागदौड़ करने वाला भाई प्रदुम्म (19) भी बारात की अगवानी से पहले तैयार होने के लिए नहाने चला गया। आधे घंटे तक जब वह बाहर नहीं आया तो घरवाले बाथरूम की ओर गए और आवाज दी। कोई जवाब नहीं आने पर घरवालों ने दरवाजे को धक्का देकर खोला। प्रदुम्म करंट से गंभीर झुलस हुआ पड़ा था। घरवाले उसे अस्पताल ले गए, मगर इलाज शुरू होने से पहले ही उसकी जान चली गई।
प्रदुम्म की मौत की खबर सुनकर कोहराम मच गया। घरवालों को कुछ भी नहीं सूझ रहा था। बड़े-बुजुर्गों ने ढांढस बंधाकर पास के ढकवा मंदिर पर शादी की रस्में पूरी कराईं तो घर में एक ओर प्रदुम्म के शव से लिपट कर मां और भाई-बहनों की सिसकियां सुनाई देती रहीं। हिमांगी के दूल्हे राजकुमार की बारात हरदोई से आई थी।
बहन को विदा करने के लिए एक-एक
गोरखपुर। छोटी बहन को डोली में बैठाने की हसरत थी। घर में पकवान बन रहे थे। मेहमानों के स्वागत की तैयारी थी। घर में शादी की शहनाई बज रही थी। चारों तरफ खुशी का माहौल था। बारात दरवाजे पर थी। मगर कुदरत को तो कुछ और ही मंजूर था। चंद मिनट में ही घर की खुशियां मातम में बदल गईं। घर में जवान बेटे प्रदुम्म की मौत हो गई और शहनाई वाले घर में चीख पुकार मच गई। दुविधा ऐसी की मातम में डूबें या बेटी को विदा करें। चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा प्रदुम्म बाहर रहकर कमाता था। व्यवहारकुशल इतना कि घर ही नहीं बाहर वालों का भी चहेता था। कुछ दिन पहले ही उपहारों के साथ घर लौटा था। शादी में कोई कमी न होने पाए इसके लिए खुद ही तैयारियों में जुटा था। लेकिन बहन की डोली उठाने की उसकी हसरत पूरी नहीं हो सकी। बेटे की मौत से टूटे पिता ने एक बार तो शादी से ही इंकार कर दिया। लेकिन गांव के लोगों के ढांढस बंधाने पर वह बेटी की शादी को राजी हुए। मां बेटे के शव को छोड़कर हटने को तैयार नहीं थी। रिश्तेदार और लोगों ने कुदरत के हृदय विदारक फैसले को स्वीकार कर बेटी की सिर पर मां का हाथ रखवाया।