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मोहित की मसक कली, मसक कली... ने भरी मस्ती

Mon, 14 Jan 2019 01:04 AM IST
ajay Kumar Gorakhpur, Uttar Pradesh, India
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महोत्सव में लोगों ने मोहित चौहन के गानों का जमकर लुत्फ उठाया। - फोटो : amar ujala
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गोरखपुर। सुरों से सजी मस्ती भरी रविवार की शाम यादगार बन गई। सुरेश वाडेकर, मोहित चौहान और रिया भट्टाचार्य की मखमली आवाज से सराबोर गोरखपुर महोत्सव फिर अगले साल मिलने का वादा कर लोगों पर अपनी छाप छोड़ गया। सितारों से सजी महोत्सव की आखिरी बॉलीवुड नाइट में गोरखपुरियों का जबरदस्त उत्साह दिखा। पहले ही गीत ‘जो भी कहना चाहूं हर बार...’ से मोहित चौहान ने महफिल लूट ली। गुरु गोरक्षनाथ को नमन करने के बाद उन्होंने जब ‘ये दूरियां इन राहों की दूरियां...’ गाना शुरू किया तो श्रोता झूमने लगे। ‘कुछ खास है कुछ बात है कुछ दूरियां...’ से मोहित ने सबको मोह लिया। ‘तुमसे ही सब है...’ गाकर उन्होंने माहौल में रूमानियत भर दी। जब मोहित ने ‘मसक कली मसक कली...’ गाया तो लोग कुर्सियों पर खड़े होकर नाचने लगे।
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उनसे पहले गायिका रिया भट्टाचार्य ने अपने गीतों से सबको खूब झुमाया। ‘इश्क से अच्छा इश्क से बेहतर इश्क से मीठा...’ गाकर रिया ने लोगों को प्यार की मिठास का अहसास कराया। ‘तू राजी मैं राजी फिर क्या डैडी क्या अम्मा...’ गाने से रिया ने लोगों को मदमस्त कर दिया। रिया ने जब ‘बलम पिचकारी जो तूने मुझे मारी...’ गीत गाया तो पंडाल में हर ओर सीटियों का शोर गूंजने लगा। ‘सारा जमाना हसीनों का दीवाना..., क्रेजी किया रे..., तुझको बनाकर ले जाएंगे बद्री की दुल्हनिया..., राधा तेरी चुनरी राधा तेरा कंगना...’ आदि गीतों से रिया भट्टाचार्य ने बॉलीवुड नाइट में सुरों का रस घोल दिया।
महोत्सव के आखिरी सुरीली शाम की शुरुआत सुरेश वाडेकर ने की। चिरपरिचित मुस्कुराहट के साथ मंच पर जब वह आए तो श्रोताओं ने तालियों से स्वागत किया। वाडेकर ने पहले गीत से ही रंग जमा दिया। ‘ओ रे राही इन्हें जाना है गुरुओं की नगरी...’ सुनाकर सबसे पहले उन्होंने गोरखपुर में नाथ योगियों के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की। फिर ‘राम तेरी गंगा मैली...’ सुनाकर लोगों की खूब तालियां बटोरीं। ‘मैं हूं प्रेम रोगी...’ गाते ही युवा झूम उठे। ‘इस दिल में क्या रखा है..., मेघा रे मेघा रे..., लगी आज सावन की फिर जो घड़ी है..., ऐ जिंदगी गले लगा ले... जैसे मशहूर गीतों से उन्होंने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सुरेश ने ‘सपनों में मिलती है कुड़ी मेरी सपनों में मिलती है...’ गीत पर कई लोग नाचते नजर आए। ‘चप्पा-चप्पा चरखा चले...’ गीत के बाद सुरेश वाडेकर मंच से विदा हुए।
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