सिद्धार्थनगर। विलुप्त हो रही काला नमक धान की खेती को फिर से समृद्ध करने की कवायद शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना’ के तहत चयनित काला नमक धान की खेती को बढ़ावा देने के लिए बुधवार को अफसरों ने बजहा ताल व इसके आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान खेती के लिए सिंचाई संसाधनों को बेहतर बनाने की संभावनाएं तलाशी गईं। वहीं, विभागीय अभियंताओं को इसके लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।
डीएम कुणाल सिल्कू के नेतृत्व में पहुंची अफसरों की टीम ने बजहा ताल की जलधारण क्षमता, उससे निकली नहरों की पूर्व और मौजूदा स्थिति, खेती का रकबा आदि विंदुओं पर जानकारी एकत्र की। डीएम ने कहा कि काला नमक की खेती के लिए भरपूर मात्रा में पानी की जरूरत होती है। लिहाजा ऐसे संसाधन विकसित किए जाएं जिससे किसानों को सिंचाई के लिए सिर्फ बारिश पर न निर्भर रहना पड़े।
कृषि और सिंचाई विभाग के अफसरों को निर्देश दिया कि संयुक्त रूप से चर्चा कर कार्ययोजना तैयार करें और उसे शीघ्र प्रेषित करें। मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार मिश्र, डीडीओ सुदामा प्रसाद, डीसी मनरेगा उमेश चंद्र तिवारी, उप निदेशक कृषि डॉ.पीके कन्नौजिया, सिंचाई विभाग के एक्सईएन आदि मौजूद रहे।
ब्रिटेन तक थी सिद्धार्थनगर के चावल की मांग
काला नमक धान जिले की पहचान रही है। ब्रिटिश काल में बर्डपुर, नौगढ़ व शोहरतगढ़ ब्लॉक इसकी खेती का गढ़ था। इस धान के चावल की आपूर्ति ब्रिटेन में होती थी। काला नमक की खेती को बढ़ावा देने के लिए ही अंग्रेजों ने बजहा, सिसवा, मझौली सहित 12 सागरों का निर्माण कराया था। इन सागरों में वर्षा का जल संग्रह कर नहरों के जरिए खेतों तक पानी पहुंचता था जिससे इस महत्वपूर्ण फसल को भरपूर पानी मिलता था। उपेक्षा के चलते तालाब बदहाल हो गए और नहरें अतिक्रमण की भेंट चढ़ गईं। फलस्वरूप एक दशक से इसकी फसल में गिरावट से विलुप्त हो रहे धान की इस प्रजाति को सिद्धार्थनगर की पहचान बनाने के लिए योगी सरकार ने पहल की। ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडेक्ट’ के तहत इसे चयनित किया गया है।