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पहचान पत्र देखने के बाद यूनिवर्सिटी कैंपस में इंट्री

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गोरखपुर।
फाइन आर्ट्स की छात्रा से छेड़छाड़ और अगवा करने की कोशिश के बाद गोरखपुर यूनिवर्सिटी कैंपस में प्रवेश पर सख्ती कर दी गई है। सोमवार को हर छात्र-छात्रा का पहचान पत्र देखा गया। कर्मचारी और रिसर्च स्कॉलर से भी पहचान पत्र मांगे गए। चीफ प्रॉक्टर प्रो. गोपाल प्रसाद की अगुवाई वाली टीम ने अलग-अलग विभागों का दौरा भी किया। छात्राओं से बात कर सुरक्षा से संबंधित जानकारी ली।
छात्रा से छेड़छाड़ की घटना के बाद गोरखपुर यूनिवर्सिटी सोमवार को खुली। इस दौरान सुरक्षा के चुस्त-दुरुस्त इंतजाम किए गए। पहचान पत्र के बगैर पहुंचे तमाम छात्रों को मुख्य गेट से वापस कर दिया गया। दोपहिया, चौपहिया वाहनों को स्टैंड में खड़ा कराया गया। बाइक से कैंपस में घूमने वाले चार छात्रों को हिदायत भी दी गई। कहा गया कि अगली बार मिले तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। चीफ प्रॉक्टर ने खुद मोर्चा संभाला। पहले वह फाइन आर्ट्स की तरफ गए, फिर प्राचीन भारत का इतिहास विभाग में जाकर छात्राओं से बात की। दीक्षा भवन के आसपास अभियान चलाया गया। बेवजह कैंपस में घूमने वाले छात्रों को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने की नसीहत दी गई। चीफ प्रॉक्टर ने बताया कि छात्रा से छेड़छाड़ की घटना को संवेदनशीलता से लिया गया है। आगे भी सख्ती बरती जाएगी। पहचान पत्र के साथ आने वाले छात्रों को ही परिसर में प्रवेश मिलेगा। इसके दिशा-निर्देश सुरक्षा कर्मचारियों को दिए जा चुके हैं।
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कुलपति ने ली जानकारी
छुट्टी के बाद यूनिवर्सिटी खुली तो कुलपति ने सुरक्षा संबंधी जानकारियां लीं। संबंधित अफसरों से पूछा कि सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे हैं या नहीं। इनके बेहतर रख-रखाव का इंतजाम किया जाए। कुलपति ने शिकायत पेटिका लगाए जाने की जानकारी भी ली। कहा कि इसी सप्ताह शिकायत पेटिका लगाई जाए। इसकी मदद से छात्राएं शिकायत दर्ज करा सकेंगी। कुछ नए स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के दिशा-निर्देश भी कुलपति ने दिए हैं।

पूरे विश्वविद्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने वीसी को सौंपा ज्ञापन
गोरखपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को कुलपति को ज्ञापन देकर पूरे विश्वविद्यालय परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने और परिसर में अराजक तत्वों के प्रवेश पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने की मांग की है। यदि कोई बाहरी छात्र पकड़ा जाए तो उसके साथ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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विश्वविद्यालय इकाई की मंत्री नेहा सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में बाहरी और अराजक तत्वों के चलते घटनाएं होती हैं। कुछ घटनाएं संज्ञान में आती हैं तो कुछ नहीं आ पातीं। चंद रोज पहले परिसर में घटी घटना से भय का माहौल है। प्रगति कश्यप ने कहा कि सात अक्टूबर की घटना में यदि प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने समय से कदम न उठाया होता तो अराजक तत्व पकड़े न जाते। सौरभ गौड़ ने कहा कि अराजक तत्वों को रोकने के लिए पहचान पत्र अनिवार्य किया जाए। साथ ही समय-समय पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड द्वारा इसकी जांच की जानी चाहिए। ज्ञापन देने वालाें में अंशुमान पाठक, सुधा सिंह, हर्षिता कौशिक, प्रकाश आदित्य, अभिषेक त्रिपाठी, वैभव सिंह, आदर्श, सौरभ सिंह, अभिनव, शिवम, मुकेश, शिखर श्रीवास्तव, अशफाक, चंदन यादव, अशफाक हुसैन, निर्भय राव आदि शामिल थे।
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