गोरखपुर। छात्रसंघ चुनाव को लेकर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय बैकफुट पर हैं। जुलाई में उपमुख्यमंत्री के साथ हुई कुलपतियों की बैठक में भी छात्रसंघ चुनाव पर सहमति नहीं बन पाई थी। इस मुद्दे पर चार अगस्त के अंक में ‘अमर उजाला’ ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। बैठक के एजेंडे में शामिल 32 संकल्प पत्रों में छात्रसंघ चुनाव को शामिल ही नहीं किया गया था। इसी वजह से चुनाव कराने पर संशय बना हुआ है।
पिछले साल गोरखपुर यूनिवर्सिटी और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने ही छात्रसंघ चुनाव कराने की जहमत उठाई थी। इसमें भी लिंगदोह समिति की सिफारिशों का पूरी तरह से पालन नहीं किया गया। कायदे से तो इसके लिए छात्र परिषद का गठन किया जाना चाहिए, मगर ऐसा नहीं हो सका। गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने भी डायरेक्ट वोटिंग का सहारा लिया, जबकि लिंगदोह समिति की सिफारिशों के अनुसार बड़ी यूनिवर्सिटी के लिए फोर डी मॉडल बनाया गया है। इसमें हर विभाग से 100 छात्रों पर एक प्रतिनिधि का चयन किया जाता है। ये प्रतिनिधि और यूनिवर्सिटी को ओर से मनोनीत मेधावी छात्र-छात्रा, हॉस्टल प्रतिनिधि, खिलाड़ियों का प्रतिनिधि और संबद्ध कॉलेजों के दो-दो प्रतिनिधि छात्रसंघ के प्रतिनिधियों का चुनाव करते हैं।