बालरोग विभाग में लगातार हो रहीं मासूमों की मौतों पर फजीहत के बाद अब बीआरडी मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाएं सुधरने लगी हैं। एक ओर जहां संसाधन बढ़ाए जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर इलाज के लिए डॉक्टर भी। इसके साथ ही नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में इंफेक्शन रोकने का फुलप्रूफ इंतजाम करने के लिए ब्लूप्रिंट तैयार किया जा चुका है। प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने अभी इसे शुरुआत बताते हुए आगे और बेहतर इंतजाम करने की बात कही है।
15 और वार्मर दिल्ली से आए
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मासूमों की मौत रोकने के लिए शासन सुविधाएं बढ़ाने में जुट गया है। इसी कड़ी में मेडिकल कॉलेज में नवजातों के इलाज के लिए जरूरी वार्मर की कमी दूर कर दी गई है। दो दिन पहले मेडिकल कॉलेज में 23 वार्मर आने के बाद रविवार को 15 और वार्मर दिल्ली से आए। मेडिकल कॉलेज के एनआईसीयू में सिर्फ 16 वार्मर होने के चलते नवजातों के इलाज में दिक्कत आ रही थी। शुक्रवार को डीएम ने 8 वार्मर महिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज भेजवाए थे। आठ और वार्मर बांदा से मंगाए जा रहे हैं। एक-दो दिन में ये वार्मर भी मेडिकल कॉलेज में पहुंच जाएंगे। नए वार्मर एनआईसीयू में दो कमरों में लगाए गए हैं। इन कमरों को संक्रमण रहित (फुमीगेशन) किया गया है। जल्द ही नवजात यहां भर्ती होने लगेंगे। प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने रविवार को इसका निरीक्षण किया।
सेप्रेट होगा एनआईसीयू, शुरू होगा टोकन सिस्टम
बालरोग विभाग के एनआईसीयू को अब सेप्रेट करने की कवायद शुरू हो गई है। प्राचार्य ने इसका प्रवेश द्वार अलग कराने की योजना बनाई है। साथ ही उन्होंने एनआईसीयू और पीआईसीयू में टोकन सिस्टम लागू करने की बात कही है। इसका मकसद गंभीर मरीजों को संक्रमण से बचाना है। प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने इंफेक्शन रोकने को फुलप्रूफ इंतजाम करने की बात कही है। इसके तहत मरीजों के तीमारदारों को अस्पताल प्रशासन अब अपनी ओर से चप्पलें मुहैया कराएगा। तीमारदार वार्ड के बाहर अपने चप्पल-जूते उतारकर इन्हीं चप्पलों को पहनकर वार्ड में दाखिल होंगे। इसके साथ ही वार्डों में एक मरीज के पास सिर्फ एक तीमारदार दाखिल हो सकेगा। इसके लिए उन्हें टोकन दिया जाएगा। दूसरा तीमारदार भीतर तब जाएगा जब पहला तीमारदार वार्ड से निकलकर उसे अपना टोकन देगा। प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने जल्द ही टोकन सिस्टम शुरू करने की बात कही।
बाहर से छह और डॉक्टर बीआरडी पहुंचे
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बालरोग विभाग में भर्ती बच्चों के इलाज के लिए छह और डॉक्टर शनिवार शाम को पहुंच गए। इसके साथ ही प्रदेश के विभिन्न जिलों से अब तक 18 डॉक्टर बीआरडी पहुंच चुके हैं। इनमें से एक प्रोफेसर, 10 जूनियर रेजीडेंट डॉक्टरों के साथ पीएचएमएस संवर्ग के दो चिकित्सक शुक्रवार को ही कॉलेज पहुंच गए थे। शनिवार शाम तक छह और डॉक्टरों के आने के बाद अब 100 बेड वार्ड में डॉक्टरों की कमी दूर हो गई है। शासन ने अगले आदेश तक के लिए इन्हें बीआरडी से अटैच किया है। प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने बताया कि इन चिकित्सकों ने 100 बेड वार्ड में मासूमों का इलाज शुरू कर दिया है। पीएचएमएस संवर्ग के तीन और डॉक्टर भी जल्द ही अस्पताल पहुंच सकते हैं। इनके आने से बालरोग विभाग में भर्ती मासूमों के साथ इंसेफेलाइटिस पीड़ित बच्चों को बेहतर इलाज मुहैया होगा।
तीमारदार और मरीजों को धूप में नहीं जलना होगा (फोटो)
मेडिसिन वार्ड की ओपीडी में आने वाले मरीजों और तीमारदारों के लिए राहत भरी खबर है। अब इनको धूप में नहीं जलना होगा। बीआरडी मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से ओपीडी के बाहर शेड लगवाया जा रहा है। हर रोज बड़ी संख्या में मरीज और तीमारदार यहां पहुंचते हैं। भीड़ ज्यादा होने के चलते मरीजों और तीमारदारों की कतार बाहर तक लग जाती थी। लोगों को कड़ी धूप में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता था। थकने पर तीमारदार यहीं धूप में बैठ जाते थे। नवागत प्राचार्य डॉ. पीके सिंह ने यहां शेड का काम शुरू करा दिया है। रविवार को आधा दर्जन मजदूर पूरे दिन काम में जुटे रहे। पोल खड़े हो चुके हैं, बस शेड डालना बाकी रह गया है। जल्द ही शेड बन जाएगा। इसके बाद यहां आने वाले मरीजों और तीमारदारों की दुश्वारियां कम हो जाएंगी।