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जेई काबू में पर एईएस बढ़ा रहा खौफ

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अस्पताल में भर्ती इंसेफेलाइटिस के मरीज। - फोटो : Amar Ujala
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गोरखपुर।
पूर्वांचल के नौनिहालों का काल मानी जाने वाली इंसेफेलाइटिस के खिलाफ जंग में स्वास्थ्य महकमे को एक मोर्चे पर कामयाबी मिली है लेकिन दूसरे में हवा में ही तलवार चलाई जा रही है। महकमे ने टीकाकरण के जरिए जेई (जापानी इंसेफेलाइटिस) पर काफी हद तक काबू पा लिया है, मगर एईएस (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) का खौफ बदस्तूर जारी है। पिछले और इस साल इंसेफेलाइटिस से हुई मौतों के आंकड़े ऐसा ही बता रहे हैं।

सीएमओ डॉ. रवींद्र कुमार मानते हैं कि जेई टीकाकरण के चलते जापानी इंसेफेलाइटिस पर जिले में काफी हद तक काबू हुआ है। पिछले साल इस बीमारी से जिले भर में सिर्फ तीन मौतें हुई हैं, जबकि पूर्व में हर साल जिले में सैकड़ों मासूमों की जान इससे चली जाती थीं। इस साल अब तक इससे एक मासूम की मौत का मामला सामने आया है। उम्मीद है कि इस साल जेई पिछले वर्ष की तरह तबाही नहीं मचा सकेगी। हालांकि, एईएस ने 2016 में 519 जिंदगियां छीन ली थीं। इस साल अब तक जिले के 42 मरीजों की मौत एईएस से हुई हैं। इनमें से दो मौतें जिला अस्पताल के इंसेफेलाइटिस वार्ड में हुई थीं तो बाकी ने मेडिकल कॉलेज में दम तोड़ा था। इसके रोकथाम के लिए स्वास्थ्य महकमे की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। लोगों को साफ-सफाई और स्वच्छ पेयजल पीने का सुझाव दिया जा रहा है।
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नहीं पता बीमारी की असल वजह
एईएस पर अंकुश न लग पाने कारण बीमारी की असल वजह का पता न होना है। कुछ लोग बीमारी का कारण इंटरो वायरस को मानते हैं तो कुछ इससे अलग सोचते हैं। बीमारी की असल वजह क्या है, तमाम शोध और जांचों के बाद भी यह अब तक अज्ञात है। इसके चलते इसका उपचार भी विकसित नहीं किया जा पा रहा है।
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