गोरखपुर।
गोरखपुर क्लब से जुड़े शहर के 50 से ज्यादा ‘रईस’ डिफॉल्टर हैं। इन सबके नाम जल्द ही नोटिस बोर्ड पर चस्पा होंगे। क्लब प्रशासन के मुताबिक रईसों ने पिछले चार साल से सदस्यता का रिन्यूवल नहीं कराया है। इसके लिए हर महीने 150 रुपये जमा करने पड़ते हैं लेकिन रईसों ने इसका अनुपालन नहीं किया। इसी का नतीजा है कि डिफॉल्टर की सूची में साहबगंज के कई बड़े व्यापारियों के नाम आ गए।
गोरखपुर क्लब की स्थापना सन 1896 में हुई थी। क्लब को प्राइवेट कंपनी के तौर पर रजिस्टर्ड कराया गया, फिर बोर्ड ऑफ मेंबर से संचालन किया जाने लगा। बोर्ड ऑफ मेंबर की मौजूदगी में एनुअल जनरल मीटिंग (एजीएम) होती है। एजीएम ही सर्व सम्मति से चुनाव कराती है। इस प्रक्रिया में भी मनमानी की गई है। इस क्लब के पदेन अध्यक्ष जिलाधिकारी गोरखपुर होते हैं लेकिन संचालन सचिव और अध्यक्ष के हाथ में होता है। इसी बीच सदस्यता शुल्क की समीक्षा हुई तो पता चला कि 50 से ज्यादा सदस्य ऐसे हैं, जिन्होंने कई सालों से प्रतिमाह का सदस्यता शुल्क नहीं जमा कराया है। इसके बावजूद सबकी सदस्यता रिन्यू की जा रही है। इसमें कुछ अफसर और बोर्ड ऑफ मेंबर की मिली भगत उजागर हुई है। आंतरिक छानबीन से पता चला है कि हर महीने जमा होने वाला सब्सक्रिप्सन चार्ज नहीं आ रहा है। इसका शुल्क 150 रुपये निर्धारित है। इसी वजह से डिफॉल्टर लिस्ट तैयार की गई है।
12 जून को एजीएम
क्लब की एजीएम 12 जून को होगी। इसमें पुरानी कमेटी का चुनाव निरस्त किया जा सकता है। साथ ही अगला चुनाव कराने और नई कमेटी के गठन पर मुहर लग सकती है। सदस्यता शुल्क की समीक्षा भी संभव है।
बोर्ड में 13 लोग, सदस्य 500
गोरखपुर क्लब प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के बोर्ड में 13 पदाधिकारी और पांच सौ सदस्य हैं।
29500 रुपये में मिलती है सदस्यता
सदस्यता शुल्क 29500 रुपये है। हर साल सदस्यता रिन्यूवल करानी पड़ती है। सदस्यता शुल्क भी जमा करनी पड़ती है।
क्लब में मिलती हैं ये सुविधाएं
लॉन टेनिस, बैडमिंटन, स्क्वैश कोर्ट, स्वीमिंग पूल, एयरकंडिशनर जिम।
क्लब ने 50 से ज्यादा सदस्यों को डिफॉल्टर घोषित कर दिया है। इनकी लिस्ट जल्द ही नोटिस बोर्ड पर चस्पा होगी। सदस्यता शुल्क नहीं मिला तो सबको क्लब की सुविधाओं से वंचित किया जाएगा। 12 जून को एजीएम है।
- अरविंद नाथ तिवारी, जनरल सेक्रेटरी, गोरखपुर क्लब