रामगढ़ ताल: अब मछलियों को मिलेगी भरपूर ऑक्सीजन
फव्वारे से ताल के पानी में बढ़ेगी ऑक्सीजन की मात्रा
एनजीटी ने 31 मार्च तय की थी इसके शुरू करने का तारीख
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। रामगढ़ ताल परियोजना के संरक्षण की दिशा में एक और कदम बढ़ा दिया गया है। ताल में फव्वारा लगाने के साथ ही पानी में आक्सीजन कम होने की नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की आपत्ति की पहली बाधा पार हो गई है। एनजीटी ने इसके लिए 31 मार्च की समय सीमा तय की थी।
रामगढ़ ताल के पानी में घुलित ऑक्सीजन (बीओडी) की मात्रा अक्सर कम हो जाने से मछलियां मर जाती हैं। पिछले दो तीन साल से लगातार ऐसा हो रहा है। घुलित आक्सीजन की मात्रा कम होने की मुख्य वजह से ताल की तलहटी में गाद का जमा होना है। दरअसल करीब पांच साल पहले तक करीब एक तिहाई शहर के नाले का पानी सीधे रामगढ़ ताल में गिरता था। नाले के पानी के साथ आने वाले सिल्ट से ताल की तलहटी में गाद इकट्ठा हो गई है। इससे ताल के पानी में प्रकाश संलेषण की प्रक्रिया धीमी हो जाती है और मछलियां मरने लगती हैं। इस स्थिति पर एनजीटी ने आपत्ति जताई थी। जिसके बाद रामगढ़ ताल परियोजना प्रबंधक ने ताल में कैस्केड फव्वारा लगाने की योजना तैयार की। 31 मार्च तक इसे पूरा कर लिया गया है। इसका ट्रायल भी सफल रहा है। इसके साथ ही ताल में लाइट एंड साउंड शो भी होगा।
25 फीट की ऊंचाई तक उठेगा फव्वारा
योजना के तहत ताल में विभिन्न स्थानों पर 25 फव्वारे लगाए गए हैं। कुछ समय के अंतराल पर इस फव्वारे का पानी 25 फीट की ऊंचाई तक ऊपर जाएगा। रामगढ़ ताल परियोजना प्रबंधक रतनसेन सिंह ने बताया कि फव्वारे का पानी जितनी देर वायुमंडल में रहेगा, उतनी देर ऑक्सीजन अवशोषित करेगा। इससे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ेगी।
- ताल के संरक्षण के लिए एनजीटी ने 31 मार्च की समयसीमा तय की थी। उसे पूरा कर लिया गया है। इससे ताल के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा में इजाफा होगा। इससे ताल के संरक्षण में मदद होगी।
रतनसेन सिंह, परियोजना प्रबंधक, रामगढ़ ताल