गोरखपुर। 26 नवंबर 2008 की वह मनहूस रात कभी नहीं भूलती, जब पाकिस्तानी आतंकवादी कसाब मुंबई के ताज होटल में घुसकर गोलियां तड़तड़ा रहा था। उसकी गोली से संतकबीनगर के चार लोग मारे गए। मैं, तीन दिन तक होटल में फंसा रहा। उम्मीद नहीं थी बचूंगा लेकिन भगवान का शुक्र है तीसरे दिन बचकर निकल सका। यह संस्मरण बस्ती के तत्कालीन सांसद और बसपा सरकार में मंत्री रहे लालमणि प्रसाद ने सुनाया। जिस वक्त हमला हुआ था, वह संसदीय कमेटी के साथ होटल ताज, मुंबई के सेकेंड फ्लोर पर थे।
अमर उजाला ने पूर्व सांसद से बात की तो भावुक हो गए। 2004-2009 के बीच बस्ती से सांसद रहे लालमणि प्रसाद बोले, 26 नवंबर का वो मंजर कभी नहीं भूलता है। कभी सोचता हूं तो रूह कांप जाती है, उस रात मुझसे मिलने संतकबीरनगर के मकसूद सहित चार लोग आए थे। आतंकियों ने उन्हें नीचे ही गोलियों से भून दिया। दरअसल, 26 नवंबर 2008 को शाम चार बजे मैें होटल ताज में गया था। देर रात पता चला कि आंतकवादियों ने होटल को कब्जे में ले लिया है।
यह पता चलने पर कलेजा सूख गया। पूरी रात जागकर बिताई। सोचा कि अगली सुबह सकुशल बाहर निकल पाऊंगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गोलियों की तड़तड़ाहट जारी रही। हर गोली के साथ जिंदगी का अंत दिख रहा था। अगली सुबह और रात भी बीत गई। भूखे, प्यासे बैठे रहे। सगे-संबंधियों से संपर्क भी नहीं हो पा रहा था। 28 नवंबर को होटल से बाहर निकला तो लगा नया जीवनदान मिला है। होटल से निकलने के बाद खूब रोया था। वह कभी न भूलने वाली घटना थी।
10 साल बाद भी नहीं सूखे घरवालों के जख्म
संतकबीरनगर। खलीलाबाद कोतवाली थाना क्षेत्र के परसंवा गांव निवासी फिरोज और निमांवा गांव निवासी मकसूद मुंबई में रहकर अपना कारोबार करते थे। इनका तीसरा दोस्त थुरंडा गांव निवासी अखलाक अहमद घर रहकर रोजगार करता था। दोस्तों के बुलाने पर अखलाक भी उनके पास पहुंचा और वहीं कारोबार करने लगा। इनके अलावा धनघटा थाना क्षेत्र के बकौली गांव निवासी हिदायतुल्लाह मुंबई में ताज होटल स्थित लियोपार्ड कैफे में काम करता था। जिस वक्त ताज होटल पर आतंकियों ने हमला किया, वह लोग सांसद लालमणि प्रसाद से मिलकर होटल से निकलने वाले थे।