गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बरगदवां स्थित बीएन डायर्स उद्योग में छह करोड़ की लागत से स्थापित 1230 किलोवाट की क्षमता का सोलर पावर प्लांट का लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ग्रीन एनर्जी के सपने को गोरखपुर में साकार करने के लिए काम किया जा रहा है। यह पावर प्लांट ऊर्जा संरक्षण के साथ साथ प्राकृतिक ऊर्जा के उपयोग का एक बेहतरीन उदाहरण है। सीएम ने उद्योगपतियों से ग्रीन ऊर्जा अपनाने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक साधनाें का दुरुपयोग करने से प्रदूषण आदि की गंभीर समस्याएं हम लोगों के समक्ष है। हमारे पास बेहतर प्राकृतिक संसाधन है जिनका अपने जीवन में उपयोग कर सकते है। प्रदेश में हर इलाके में साल में 10 माह अच्छी धूप रहती है उसका उपयोग हम सोलर ऊर्जा या ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में कर सकते हैं।
सोलर प्लांट से हर माह करीब 12 लाख की बचत
गोरखपुर। वीएन डायर्स बरगदवां में लगाया गया सोलर प्लांट अनूठा है। यहां सोलर पैनल जमीन, शेड और छत पर भी लगाया है। 325 वाट के कुल 3788 सोलर पैनल लगाए गए हैं। 1230 किलोवाट क्षमता वाले इस सोलर प्लांट से वीएन डायर्स को हरेक माह 10 से 12 लाख रुपये की बचत होगी।
वीएन डायर्स के चेयरमैन विष्ुण अजीत सरिया ने बताया कि हमारे यहां प्रति माह करीब 2000 किलोवाट बिजली की खपत है। ऐसे में यह प्लांट करीब दो तिहाई जरूरत पूरा कर देगा। उन्होंने शहर के अन्य उद्योगपतियों से इस सिस्टम को अपनाने की अपील की। छह करोड़ रुपये की लगात से निर्मित किए गए इस सोलर प्लांट को बनाने में तीन माह का वक्त लगा।
जरूरत से ज्यादा बिजली निगम को बेंच सकेंगे
प्लांट लगाने वाली कंपनी सनगार्नर एनर्जीज प्राइवेट लिमिटेड के सुनील गोयल ने बताया कि फिलहाल सोलर प्लांट से तैयार होने वाली बिजली फैक्टरी में ही खपत होगी, लेकिन इसमें नेटमीटरिंग का भी प्रावधान है। जरूरत से ज्यादा बिजली का निर्माण होने पर प्लांट ग्रीड के मार्फ त बिजली निगम को बिजली बेच सकता है।
हर साल पांच लाख लीटर डीजल की बचत होगी
वीएन डायर्स में लगाए गए इस सोलर प्लांट से हर साल करीब 17 लाख यूनिट बिजली बनेगी। इसकी वजह से प्रति वर्ष करीब पांच लाख लीटर डीजल की बचत होगी। साथ ही करीब 14 लाख किलोग्राम कार्बन का उत्सर्जन कम होगा। विष्णु अजीत सरिया ने बताया कि इससे प्रति यूनिट बिजली की लागत मात्र 3.50 लाख रुपये आएगी। पहले एक यूनिट के लिए बिजली विभाग को करीब 7.50 रुपये भुगतान करना होता था।