गोरखपुर। गोरखधाम एक्सप्रेस के एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों को अब तौलियों की जगह डिस्पोजल नैपकिन दी जाएगी। पूर्वोत्तर रेलवे की यह पहली ट्रेन होगी जिसमें इसी महीने से यह सुविधा शुरू होगी। यात्रियों ने इसे बेहतर बताया तो पांच और ट्रेनों में इसे दिया जाएगा। पर्यावरण के अनुकूल इन नैपकीन की सप्लाई कोलकाता की एक फर्म कर रही है। 20,500 नैपकीन 10 अक्टूबर को गोरखपुर पहुंच जाएंगी। यह विशेष नैपकीन महज पांच सेकेंड में पानी को सोख लेगी।
ट्रेन में यात्रियों को तौलिए न मिलने की शिकायत पर पड़ताल में सामने आया कि गायब होेने के चलते अटेंडेंट तौलिए देने में आनाकानी करते हैं। इसके समाधान के लिए रेलवे बोर्ड ने इको फ्रेंडली डिस्पोजल नैपकीन देने का फैसला लिया है। वहीं इसमें खर्च भी कम आएगा। प्रत्येक यात्री को एक जोड़ी नैपकीन दी जाएंगी। इनके फटने, गायब होने का डर भी नहीं रहेगा। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि इस महीने से वीआईपी ट्रेन में डिस्पोजल नैपकीन यात्रियों को दी जाएंगी।
तौलिए से थोड़ी छोटी होगी नैपकीन
गोरखपुर। डिस्पोजल नैपकीन को 50 फीसदी से ज्यादा कॉटन और फाइबर से बनाया गया है। इसका वजन 50 ग्राम है और इसका आकार 40 गुणा 30 सेंटीमीटर रखा गया है। जबकि वर्तमान में दिए जा रहे तौलिए की साइज 52 गुणा 40 सेंटीमीटर है।
एक ट्रेन में 800 नैपकीन की खपत
गोरखपुर। लंबी दूरी की ट्रेनों में एसी के पांच कोच लगाए जाते हैं। एक कोच में 72 बर्थ होते हैं जबकि नए वाले एलएचबी कोच में 80 कोच हैं। एक यात्री को एक जोड़ी नैपकीन दिए जाएंगे। इस हिसाब से एक ट्रेन में करीब 800 नैपकीन की जरूरत होगी।